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सऊदी तेल सुविधाओं पर हमले

Attacks on Saudi Oil facilities

उल्लेख: GS2 || अंतर्राष्ट्रीय संबंध || भारत और दुनिया के बाकी || पश्चिम एशिया

सुर्खियों में क्यों?

  • सऊदी की राज्य की तेल कंपनी अरामको के दो महत्वपूर्ण तेल स्थल खुरियास (ऑयलफील्ड) और अबकैक (तेल प्रसंस्करण सुविधा) ड्रोन और मिसाइलों के एक बड़े हमले में क्षतिग्रस्त हुए।
  • यमन के हउदी विद्रोहियों ने हमले की जिम्मेदारी ली और कहा कि यह यमन पर सउदी द्वारा किये गये हालिया हवाई हमले का प्रतिउत्तर था।

प्रभाव

सऊदी अरब दुनिया में तेल के सबसे बड़े उत्पादकों में से एक है। इन हमलों का दुनिया के आर्थिक और भू-राजनीतिक परिदृश्यों पर स्थायी प्रभाव पड़ा है। इससे मध्य पूर्व की स्थिति बिगड़ रही है क्योंकि अमेरिका ईरान पर हमले का आरोप लगा रहा है।

कुछ प्रमुख प्रभाव:

विश्व पर

  • ये हमले लगभग 5 मिलियन बैरल प्रति दिन के कच्चे तेल के उत्पादन पर किये गये हैं।
  • दुर्घटनाग्रस्त स्थल अबकैक दुनिया की सबसे बड़ी तेल प्रसंस्करण सुविधा है। इस स्थल को नुकसान होने से तेल की कीमतों में 15% की वृद्धि हुई है।
  • इन हमलों ने सऊदी साम्राज्य की वायु रक्षा प्रणाली पर सवाल उठा दिया है क्योंकि सऊदी अरब सबसे बड़ा रक्षा आयातक है। हालांकि सऊदी के पास एंटी मिसाइल सिस्टम है लेकिन यह ड्रोन का पता लगाने में विफल रहा।
  • ड्रोन का उपयोग और इसकी सटीक सफलता दुनिया भर के अन्य आतंकवादियों को ड्रोन के साथ अपने दुश्मनों पर हमला करने के लिए प्रभावित कर सकती है। यह सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में भी चिंता का विषय है।
  • S ने ईरान पर जोरदार आरोप लगाया और उसे इसका जवाब देने की धमकी भी दी। इससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है या पूर्ण युद्ध हो सकता है।
  • यमन संकट जिसेसबसे बड़े मानव निर्मित मानवीय संकटके रूप में भी संदर्भित किया जाता है, और बिगड़ सकता है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन और ईरान समर्थित हउदी विद्रोहियों के बीच यह संघर्ष वर्षों से चल रहा है।

 भारत पर

  • इराक के बाद सऊदी हमारा दूसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता है।
  • भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 83% आयात करता है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से भारत की आर्थिक वृद्धि को नुकसान होगा।
  • ब्रेंट में $ 10 की बढ़ोतरी से भारत का वार्षिक आयात बिल $ 15 बिलियन हो जाएगा। तेल की कीमतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि भारत के चालू खाता घाटे को GDP के4-0.5 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। परिणामस्वरूप कीमतों में वृद्धि देखी जा सकती है। .
  • यह भारत के करेंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को भी बढ़ाएगा। यह हमारे आर्थिक स्वास्थ्य को और कमजो़र कर देगा जो पहले से ही मंदी से गुज़र रहा है।
  • सऊदी ने कहा है कि वह भारत की ऊर्जा सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत को क्या करना चाहिए?

बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत को इंजनों को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आवश्यकता है।

  • भारत को अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लानी चाहिए। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र के अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करना चाहिए।
  • भारत को कच्चे तेल की जरूरतों के लिए मध्य पूर्व से अलग कोई विकल्प खोजना चाहिए क्योंकि यह क्षेत्र हमेशा अशांत रहता है।
  • भारत को अपनी वायु रक्षा प्रणाली को मज़बूत करना चाहिए, क्योंकि ड्रोन हमला पाक समर्थित आतंकी संगठन से खतरा बनकर उभर सकता है। हमें मानवरहित हवाई वाहन (UAV) नियमों को कड़ा करना चाहिए।
  • भारत को अपनी निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए क्योंकि भारत सऊदी और ईरान दोनों के अनुकूल है। जबकि सऊदी हमें तेल प्रदान करता है, हमारे पास ईरान में चाबहार बंदरगाह जैसी प्रमुख विकास परियोजनाएं हैं। यह अफगानिस्तान और मध्य एशियाई देशों तक पहुँचने का हमारा प्रवेश द्वार है।
यमन संकट

2011 में अली अब्दुल्ला सालेह के नेतृत्व में लंबे समय तक सत्तावादी यमन सरकार अरब स्प्रिंग के कारण समाप्त हो गई। इसके बाद अब्द्रबुहा मंसूर हादी को सत्ता हस्तांतरित हुई। उन्हें दक्षिण में अलगाववादी, भ्रष्टाचार, खाद्य सुरक्षा जैसी कई समस्याओं का सामना करना है। हउदी शिया मुस्लिम विद्रोही आंदोलन ने नए राष्ट्रपति की कमजोरी का फायदा उठाया और उत्तरी साद प्रांत पर कब्ज़ा कर लिया।  वे और मजबूत हुए और राष्ट्रपति हादी को देश छोड़ने के लिए मजबूर करने पर सना का नियंत्रण भी ले लिया। सऊदी अरब ने ईरान पर हउदी विद्रोहियों को शस्त्र और हथियारों की आपूर्ति करने का आरोप लगाया। यू.एस., यू.के. और फ्रांस द्वारा समर्थित अन्य सुन्नी देशों के साथ सऊदी ने हउदी के खिलाफ हवाई हमले शुरू किए क्योंकि उनका उद्देश्य हादी सरकार को बहाल करना था। यह यमन युद्ध की स्पष्ट व्याख्या है, लेकिन शक्तिशाली देशों के हस्तक्षेप के कारण, दक्षिणी भाग में शिया सुन्नी संघर्ष और अलगाववादी आंदोलनों ने इसे जटिल और सबसे खराब मानवीय संकट बना दिया, जिसमें 7000+ नागरिकों की हत्या हुई।