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गैर-राज्य अभिकर्ता (Non State Actors) क्या हैं? अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गैर-राज्य अभिकर्ताओं की भूमिका और प्रभाव

What are Non-State Actors? Role and impact of Non-State Actors in International Relations?

प्रासंगिकता

  • जीएस 3 || सुरक्षा || आंतरिक सुरक्षा के खतरे || आतंकवाद

गैर-राज्य अभिकर्ता क्या हैं?

  • गैर-राज्य अभिकर्ता एक व्यक्ति या संगठन कोई भी हो सकता है, जिसके पास मजबूत आर्थिक, राजनीतिक या सामाजिक शक्ति होती है और वे राष्ट्रीय और कभी-कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव डाल सकते हैं।

गैर-राज्य अभिकर्ता का ताल्लुक किसी राज्य विशेष या देश से नहीं होता है।

  • इनमें गैर सरकारी संगठन, बहुराष्ट्रीय कंपनियां, धार्मिक संगठन, ड्रग कार्टेल, माफिया, आतंकवादी समूह आदि शामिल हैं। वे किसी देश की शांति, स्थिरता और विकास के खिलाफ मिलकर काम कर सकते हैं।

अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आतंकवादी द्वारा उपयोग की जाने वाली रणनीतियां

  • साइबर आतंकवाद
    • इस प्रकार के हमलों में कंप्यूटर, नेटवर्क और उसमें संग्रहीत जानकारी को जुटाने के लिए गैरकानूनी तौर पर तकनीकी मदद से निशाना बनाया जाता है। ऐसा अक्सर आतंकवादियों द्वारा अपने उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए सरकार या उनके लोगों को डराया या मजबूर किया जाता है।
    • यह आतंकवाद का एक नया तरीका है- साइबर आतंकवाद में, सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग इंटरनेट से जुड़ी सेवाओं को मौलिक रूप से बाधित होगी।
    • उदाहरण के लिए, साइबर आतंकवादी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए पूरे नेटवर्क सिस्टम को हैक कर सकते हैं।
  • परमाणु आतंकवाद
    • परमाणु आतंकवाद का अर्थ है आतंकवादियों द्वारा परमाणु सामग्री का अलग तरीकों से हमला करना। इसमें परमाणु सुविधाओं पर हमला करना, परमाणु हथियार तैयार करना या परमाणु हथियार खरीदने जैसे तरीक शामिल है।
    • परमाणु अनुसंधान केंद्र या परमाणु ऊर्जा संयंत्र पर हमले के परिणाम यूएसएसआर में 1986 की चेरनोबिल आपदा के प्रभावों के बराबर या उससे अधिक हो सकते हैं।
  • नारको आतंकवाद
    • इसमें नशीली दवाओं के तस्करों द्वारा सिस्टेमेटिक तरीकों से सरकार की नीतियों को प्रभावित करने से लेकर हिंसा शामिल है।
  • जैव-आतंकवाद
    • बायो टेररिज्म में राजनीतिक या अन्य कारणों के नाम पर निर्दोष नागरिकों को नुकसान पहुंचाने और डराने के लिए जैविक विषाक्त पदार्थों का उपयोग किया जाता है।
    • यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने वायरस, बैक्टीरिया और विषाक्त पदार्थों को वर्गीकृत किया है जिनका उपयोग हमले में किया जा सकता है-
  • एंथ्रेक्स
  • चेचक
  • प्लेग
  • बोटुलिज्म
  • तुलारेमिया
  • एक नया प्रभावशाली गैर-राज्य अभिकर्ता
    • विकेंद्रीकृत स्वायत्त संगठन (DAO), जिन्हें विकेन्द्रीकृत स्वायत्त निगम (DACs) के रूप में भी जाना जाता है, जो कंप्यूटर प्रोग्राम के रूप में एन्कोड किए गए नियमों के अनुसार काम करते है। गैर-राज्य अभिकर्ता के लिए प्रौद्योगिकी और AI वर्तमान युग में एक बहुत ही महत्वपूर्ण टूल बन गए हैं।

भारतीय आंतरिक सुरक्षा के सामने चुनौतियां

  • मानव तस्करी: बांग्लादेश और नेपाल के माध्यम से बच्चों और महिलाओं की तस्करी होती है।
  • फेक करेंसी- ऐसे मामले खासकर पाकिस्तान से सामने आते रहे हैं।
    • अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला करने में काले धन और मनी लॉन्ड्रिंग और यहां तक कि टेरर फंडिंग जैसी गतिविधियां शामिल होती है।
    • फेक करेंसी की मुख्य वजह भी यही मानी जाती है।
  • नागरिक समाज संगठन: कई एनजीओ पर सरकारों, विदेशी दानदाताओं से सहायता अनुदान के रूप में प्राप्त धन के दुरुपयोग करने का गंभीर आरोप लगता रहा है। इन पर सरकारी फंडिंग लेकर विदेशी सरकारों के लिए काम करने और समाज में वैमनष्य फैलाने जैसे भी आरोप लगे हैं।
  • उग्रवाद: खासकर उत्तर-पूर्व में जातीय आधारित हिंसक आंदोलनों से संघर्ष देखा जाता रहा है।
    • चीन पर ऐसे कृत्यों का समर्थन करने का आरोप है, उदाहरण के लिए असम के उल्फा सदस्यों को चीन ने पनाह दी थी।
  • आतंकवाद: भारत के खिलाफ पाकिस्तान सालों से टेरर स्पॉन्सर जैसी हरकतें करता रहा है। जिसमें लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खूंखार आतंकवादी संगठन शामिल है।
  • नक्सलवाद: छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अशांति फैलाने में उग्र वामपंथी पर आरोप लगता रहा है।
  • ड्रग तस्करी: गोल्डन क्रिसेंट और गोल्डन ट्राएंगल मार्गों के माध्यम से अंतरराज्यीय और अंतर्राज्यीय तस्करी होती है।
    • पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान से होने वाली ड्रग तस्करी ने सबसे ज्यादा पंजाब को प्रभावित किया है।
  • सांप्रदायिकता: सामाजिक-धार्मिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाकर और दंगों को सुनिश्चित करने के लिए भारत को अस्थिर करने के लिए दुश्मन देशों और अन्य गैर-राज्य अभिकर्ताओं द्वारा प्रचार चलाया और वित्त पोषित किया जाता है।
  • साइबर सुरक्षा: लीजन द्वारा हाल के साइबर हमले, एटीएम स्किमिंग इसके उदाहरण हैं। पाकिस्तानी हैकर्स अक्सर सरकारी वेबसाइटों को हैक कर लेते हैं।

भारत और पड़ोसी देशों में आतंकवादी हमलों के हालिया उदाहरण

  • 1993 बॉम्बे बम विस्फोट,
  • 1998 कोयंबतूर बम विस्फोट,
  • लाल किले पर 2000 का आतंकवादी हमला,
  • 2001 भारतीय संसद पर हमला,
  • 2005 दिल्ली बम विस्फोट,
  • 2008 बैंगलोर सीरियल ब्लास्ट और
  • 2008 मुंबई हमले।
  • 14 फरवरी 2019 को- जम्मू और कश्मीर के पुलवामा में एक वाहन-युक्त आत्मघाती हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की मौत हो गई।
  • 26 फरवरी को भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में समूह के एक प्रशिक्षण शिविर पर हमला किया।
  • बांग्लादेश में 2016 में, गुलशन शहर में ढाका होली आर्टिसन बेकरी पर एक अभूतपूर्व हमले में 17 विदेशियों सहित 29 लोगों की मौत हो गई थी।
  • पाकिस्तान शहरी क्षेत्र जैसे कराची, पेशावर और क्वेटा आदि आतंकवाद से भरे हुए हैं।

इस तरह के हमलों में वृद्धि के कारण

  • आसान लक्ष्य- शहरी समूहों और शहरी जन परिवहन बुनियादी ढांचे में निर्मित वातावरण की सघनता के कारण आतकंवाद का आसान निशाना बन जाते हैं।
  • भय का आसान प्रसार- चूंकि आतंकवाद का मुख्य उद्देश्य प्रोपेगेंडा का फैलाना है, ऐसे में आतंकवादियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए वे टारगेट के लिए शहरी वातावरण का सबसे ज्यादा और आसानी से चुनते हैं, ताकि मीडिया कवरेज भी मिले। इससे समाज में डर का माहौल पैदा करने जैसे मंसूबे सफल हो जाते हैं।
  • इंटरनेट के कारण कमजोरियां – व्यक्तिगत डेटा की बढ़ती उपलब्धता ने व्यक्तियों को आतंकवाद के प्रति संवेदनशील बना दिया है। ऐसी जानकारी का उपयोग कट्टरता या हिंसा के कृत्यों को लक्षित करने के लिए किया जा सकता है।
    • सरकार की साख पर प्रहार करना- हाई प्रोफाइल सांकेतिक लक्ष्यों पर हमला करके यह साबित करना कि सरकार अपने कीमती डेटा की रक्षा नहीं कर सकती, तो आम आदमी की सुरक्षा कैसे करेगी।
  • आतंक वित्तपोषण

वैध गतिविधियों का वित्तपोषण

  • कानूनी गतिविधियों की आय से भी धन प्राप्त किया जा सकता है।
  • एक उग्रवादी विचारधारा के समर्थक अपनी आय के स्रोतों से आतंकवादी संगठनों को वित्तीय योगदान दे सकते हैं।
  • इस तरह के योगदान कुछ गैर-लाभकारी या धर्मार्थ संस्थानों के लिए भी किए जा सकते हैं जो आतंकवादी संगठनों के लिए एक मोर्चे के रूप में कार्य करते हैं।
  • हवाला- आतंकवादी संगठन भी बड़ी मात्रा में नकदी की तस्करी और पैसे के हस्तांतरण के अनौपचारिक माध्यमों का सहारा लेते हैं।
  • नशीली दवाओं की तस्करी- मादक पदार्थों की तस्करी, नशीले पदार्थों के व्यापार आदि में शामिल कार्टेल का सहारा लेना या उनके साथ मिलकर काम करना।
  • तस्करी- फंडिंग में करेंसी की जालसाजी, करेंसी की तस्करी आदि भी शामिल हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गैर-राज्य अभिकर्ता की प्रमुख भूमिका इस प्रकार है:

  • संप्रभुता और राष्ट्रवाद की अवधारणा में परिवर्तन
    • गैर-राज्य अभिकर्ता और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के उद्भव ने राज्य-केंद्रित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली पर हमला किया है। इसने अंतररष्ट्रीय संबंधों की प्रकृति को भी बदल कर रख दिया है।
    • गैर-राज्य अभिकर्ता ने संप्रभुता और राष्ट्रवाद की अवधारणाओं में बदलाव के लिए मजबूर किया है।
    • इसने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अभिकर्ता के रूप में राष्ट्र-राज्यों की भूमिका को प्रभावित किया है।
    • राष्ट्र-राज्यों की नीतियां, निर्णय और कार्य अब गैर-राज्य अभिकर्ता की उपस्थिति और गतिविधियों को देखकर भी बनने लगे हैं।

ये शक्तिशाली समूह राज्यों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित कर सकते है। एक समूह जो वर्तमान में सक्रिय है, वह है अल-कायदा और गाजा में हमास।

  • गैर-राज्य अभिकर्ता और राष्ट्र-राज्य प्रणाली
    • गैर-राज्य अभिकर्ता ने राष्ट्र-राज्य प्रणाली के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय संबंधों में राष्ट्र-राज्य की भूमिका में कई बड़े बदलाव किए हैं।
    • ये कुछ क्षेत्रों, विशेष रूप से बहुराष्ट्रीय निगमों में राष्ट्र-राज्य की भूमिका पर भारी पड़ गए हैं और ये अभी भी उनको प्रभावित कर रहे हैं।
    • उदाहरण- अफगानिस्तान के लिए तालिबान।
  • अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक नई जटिलता
    • गैर-राज्य अभिकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को और अधिक जटिल और समस्याग्रस्त बना दिया है। ये अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में राजनीतिक संबंधों के कम महत्व के लिए मुख्य जिम्मेदार रहे हैं।
    • इनमें से कुछ अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के खिलाफ काम कार्य कर रहे हैं जबकि अन्य अल्प विकसित देशों के लिए नव-उपनिवेशवाद और निर्भरता के एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं। इन्होंने अंतरराष्ट्रीयता के पक्ष में राष्ट्रवाद को कमजोर करने में योगदान दिया है।
    • ये कई मजबूत शांतिपूर्ण, विकासात्मक और पारिस्थितिक आंदोलनों के उद्भव में भी सहायक रहे हैं।
    • अंतरराष्ट्रीय संबंधों में महत्वपूर्ण अभिकर्ताओं के रूप में कार्य करने वाले कई गैर-राज्य और अंतर-सरकारी संगठनों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संस्थागतकरण समकालीन अंतरराष्ट्रीय संबंधों की एक सतत घटना है।
    • उदा. ग्रीनपीस, रेड क्रॉस/रेड क्रिसेंट, एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे एनजीओ
  • आतंकवाद से निपटने के लिए रूपरेखा
  • नैटग्रीड (NATGRID):नैटग्रिड का उद्देश सुरक्षा व ख़ुफ़िया एजेंसियों के लिये आव्रजन प्रवेश और निकास से सम्बंधित डाटाबेस, किसी संदिग्ध के बैंकिंग और टेलीफोन से सम्बंधित विवरण हेतु एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म के रूप में वन-स्टॉप केंद्र बनाना है।
    • CERT-In और NATGRID को मानव संसाधन और बजटीय सहायता द्वारा कुशलतापूर्वक समर्थित होना चाहिए।
  • इंटरनेट के बढ़ते उपयोग के युग में भारतीय पुलिस सेवा की तर्ज पर एक पूरे भारतीय साइबर सुरक्षा सेवा बनाई जानी चाहिए
  • राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (एनसीसीसी) को भारत में साइबर सुरक्षा और ई-निगरानी एजेंसी के रूप में स्थापित किया गया है।
  • गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967
    • यह कानून भारत की संप्रभुता और एकता को खतरें में डालने वाली गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था। गैर-कानूनी गतिविधियों से तात्पर्य उन कार्यवाहियों से है जो किसी व्यक्ति/संगठन द्वारा देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता को भंग करने वाली गतिविधियों को बढ़ावा देती है।
  • टेरर फंडिंग एंड फेक करेंसी (TFFC) सेल
    • टेरर फंडिंग और नकली करेंसी के मामलों की एक केंद्रित जांच करने के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में एक टेरर फंडिंग एंड फेक करेंसी (टीएफएफसी) सेल का गठन किया गया है।

प्रश्न

भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां उत्पन्न करने में राज्येत्तर तत्वों की भूमिका का परीक्षण कीजिए। इसके अलावा, गैर-राज्य अभिकर्ताओं से खतरों का मुकाबला करने के उपाय सुझाइयें।

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