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पश्चिम बंगाल सरकार विधान परिषद की करेगी स्थापना - विधान परिषद के फायदे और नुकसान

West Bengal Government to set up Legislative Council – Pros and Cons of Legislative Council

प्रासंगिकता

जीएस 2 || राजनीति || राज्य सरकार || राज्य विधायिका

  • सुर्खियों में क्यों?
  • हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में एक निर्णय लिया गया, जिसमें नवनिर्वाचित पश्चिम बंगाल सरकार ने एक विधान परिषद (विधान परिषद) के गठन की योजना बनाई।
  • इससे पहले वाम मोर्चे वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद 1969 में पश्चिम बंगाल विधान परिषद को समाप्त कर दिया गया था।

विधान परिषद क्या हैं?

  • विधान परिषद (LC) उन राज्यों में उच्च सदन है, जिनमें द्विसदनीय विधायिका है; निचला सदन राज्य विधानसभा कहलाता है।
  • राज्य सभा की तरह विधान परिषद भी एक स्थायी सदन है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता है।

अनुच्छेद 169- राज्यों में विधान परिषदों का उत्सादन या सृजन

  • संसद के पास शक्ति है कि वो विधान परिषद को समाप्त कर सकती है या एक साधारण बहुमत से उसका सृजन कर सकती है। इस दौरान प्रत्येक सदन के सदस्यों का मतदान में
  • बहुमत होना जरूरी है। इसके अलावा संबंधित राज्य की विधानसभा भी बहुमत के आधार पर इसका निर्माण कर सकती है।
  • वहीं इसके उन्मूलन के लिए विधानसभा में वोटिंग के दौरान सदस्यों का बहुमत होना जरूरी है। उन्मूलन के लिए सदन में कम से कम दो-तिहाई बहुमत होना चाहिए।
  • बहुमत का खेल
  • विधानसभा की कुल सदस्यता का बहुमत औरविधानसभा में उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का बहुमत होना जरूरी है।

सदस्यों की अवधि

  • राज्य विधान परिषद का प्रत्येक सदस्य छह साल साल के लिए होता है और प्रत्येक दो साल पर एक तिहाई सदस्य हट जाते हैं।
  • यह व्यवस्था भारत की संसद के उच्च सदन– राज्य सभा के समानांतर है।
  • विधानपरिषद का सदस्य भारत का नागरिक होना चाहिए। उसकी उम्र कम से कम 30 वर्ष होनी चाहिए। वह मानसिक रूप से स्वस्थ और दिवालिया नहीं होना चाहिए।

सदन की संरचना

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 खंड (1) के अनुसार, किसी राज्य की विधान परिषद में सदस्यों की कुल संख्या उस राज्य की विधान सभा में सदस्यों की कुल संख्या के एक
  • तिहाई से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • किसी राज्य की विधान परिषद में सदस्यों की कुल संख्या किसी भी स्थिति में 40 से कम नहीं होगी।

विधान परिषद में प्रतिनिधित्व

  • 1/3 सदस्य राज्य विधान सभा सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं,
  • 1/3 सदस्यों का चुनाव पंचायती राज संस्थाओं/यूएलबी के प्रतिनिधियों द्वारा किया जाता है
  • 1/12 सदस्यों का चुनाव शिक्षकों द्वारा किया जाता है।
  • 1/12 सदस्य स्नातकों द्वारा चुने जाते हैं।
  • 1/6 राज्यपाल द्वारा मनोनीत होते हैं। (कला, विज्ञान, साहित्य, समाज सेवा और सहकारिता आंदोलन सहित विभिन्न क्षेत्रों से)।

 राज्यों विधान परिषद

छह राज्यों में विधान परिषद हैं

  • आंध्र प्रदेश
  • बिहार
  • कर्नाटक
  • महाराष्ट्र
  • तेलंगाना
  • यूपी
  • जम्मू और कश्मीर की एक परिषद थी जब तक कि 2019 में राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित नहीं किया गया था।
  • 1986 में तमिलनाडु ने परिषद को समाप्त कर दिया।
  • ओडिशा विधानसभा ने विधान परिषद के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है।
  • राजस्थान और असम में परिषद बनाने का प्रस्ताव राज्यसभा में लंबित है।

राज्य विधान परिषदों के निर्माण का औचित्य

  • विधानसभा द्वारा जल्दबाजी में की गई कार्रवाइयों पर रोक लगाने के लिए कार्य करना।
  • विधान परिषद का सदस्या बिना चुनाव जीते ही सीधे सरकार के काम में मदद कर सकता है।
  • बिना चुनाव लड़े राजनीतिक में प्रवेश का मौका।
  • सदनों के बीच काम का बंटवारा।

दूसरे सदन के खिलाफ तर्क

  • इसे सरकारी खजाने पर एक अनावश्यक रूप से खर्च का दबाव बढ़ता है
  • पार्टी के वफादारों का नामांकन
  • विद्वानों का तर्क है कि बुद्धिजीवियों को विधायिका में लाने के बजाय पार्टी इसका गलत इस्तेमाल कर उन लोगों को विधान परिषद में भेजती है, जो चुनाव नहीं जीत पाए थे।

सीमित शक्तियां

  • राज्य सभा के विपरीत, जिसके पास गैर-वित्तीय कानून को आकार देने की पर्याप्त शक्तियां हैं, विधान परिषदों के पास ऐसा करने के लिए संवैधानिक अधिकार नहीं है।
  • विधान सभाओं के पास परिषद द्वारा विधान में किए गए सुझावों/संशोधनों पलटने की शक्ति है।
  • राष्ट्रपति के चुनाव में विधान परिषद की कोई भूमिका नहीं होती है।
  • एमएलसी भी राज्यसभा सदस्यों के चुनाव में मतदान नहीं कर सकते हैं।
  • यह निचले सदन के कार्यों को नहीं रोक सकता – धन विधेयकों के संबंध में विधान परिषद केवल चौदह दिनों की देरी कर सकता है, जो कि सिर्फ एक औपचारिकता की भूमिका निभाता है।

 प्रश्न

हमारे संविधान के संस्थापकों के अनुसार विधान परिषद की जो भूमिका निभाने की परिकल्पना की गई थी, उस पर चर्चा कीजिए।