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आरबीआई ने केंद्र को अधिशेष के रूप में 99,122 करोड़ रुपये के हस्तांतरण को दी मंजूरी

RBI approves transfer of Rs 99122 crore as surplus to Centre

प्रासंगिकता

  • जीएस 3 ||अर्थव्यवस्था || बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र ||आरबीआई

सुर्खियों में क्यों?

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने केंद्र सरकार को 99,122 करोड़ रुपये के अधिशेष को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया है। इस प्राप्ति से केंद्र को कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर से मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
  • केंद्रीय बैंक ने आकस्मिक जोखिम बफर (सीआरबी) को 50 प्रतिशत प्रति वर्ष पर बनाए रखने का भी निर्णय लिया है

इस संबंध में प्रावधान

  • 1934 में स्थापित आरबीआई 1934 के भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम के अनुसार संचालित होता है। अधिनियम में यह प्रावधान है कि केंद्रीय बैंक द्वारा अपने संचालन से प्राप्त हुए लाभ को केंद्र को भेजा जा सकता है।
  • आरबीआई हर साल अपने वित्तीय प्रबंधक के रूप में सरकार को अपने अधिशेष या लाभ से वित्त में मदद करने के लिए लाभांश का भुगतान करती है।

इससे जुड़ी समितियां

बिमल जालान समिति

  • इस समीति के अंतर्गत आरबीआई की सरप्लस वितरण नीति को अंतिम रूप दिया गया था। जालान समिति की सिफारिशों के अनुरूप आरबीआई के मौजूदा आर्थिक पूंजी ढांचे की
  • समीक्षा करने के लिए सरकार के परामर्श को शामिल किया गया।
  • इसमें सुझाव दिया गया कि सीआरबी को आरबीआई की बैलेंस शीट के 5% से 6.5% के दायरे में बनाए रखने की जरूरत है।
  • मार्गदर्शक सिद्धांत– यह समिति केंद्रीय बैंक के अधिशेष हस्तांतरण के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत व इसके लागू करने की विशेष समय-सीमा का सुझाव दे सकती है।

आलोचनाएं

  • कुछ विशेषज्ञों ने इस कदम की आलोचना करते हुए कहा कि इससे आरबीआई की स्वायत्तता को नुकसान पहुंच सकता है।
  • वित्तीय अस्थिरता- इससे वित्तीय झटके से संभावित खतरे और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने और बाजारों में विश्वास पैदा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
  • रिजर्व बैंक की स्वायत्ता को बनाए रखना बेहद जरूर ही है, क्योंकि वित्तीय संकट के दौरान केंद्रीय बैंक को सरकार पर निर्भर नहीं होना पड़े।

वाई एच मालेगाम (2013)

  • वाई एच मालेगाम (2013) की अध्यक्षता में आरबीआई बोर्ड की एक तकनीकी समिति ने सरकार को उच्च हस्तांतरण की सिफारिश की थी। यह वही समीति है जिसने भंडार की पर्याप्तता और अधिशेष वितरण नीति की समीक्षा की थी।

उच्च अधिशेष (High surplus) का क्या कारण हो सकता है?

  • वित्तीय वर्ष 2021 में आरबीआई ने बांड खरीद के रूप में खुले बाजार के संचालन की एक बड़ी राशि से आय अर्जित की है।
  • इसके अलावा बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार के आने से भी आरबीआई के आय में वृद्धि हुई है।
  • केंद्रीय बैंक द्वारा संचालित लिक्विडिटी ऑपरेशन से भी आय में वृद्धि हुई है।
  • रिवर्स रेपो दर और रेपो दर के बीच व्यापक प्रसार भी इस वर्ष के अधिशेष का एक कारक हो सकता है।

इस कदम का महत्व

  • केंद्र को राहत
  • उच्च स्थानांतरण से सरकारी वित्त में सहायता मिलेगी।
  • यह फंड सरकार को उस वक्त मिल रहा है, जब देश कोरोनावायरस की महामारी से जूझ रहा है और रोज कोविड के नए आंकड़े डरा रहे हैं।
  • संक्रमण को खत्म करने के लिए लगाई पाबंदियों ने देश की आर्थिक सुधार पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
  • आरबीआई ने सरकार को सरप्लस फंड ट्रांसफर करके सरकार की मदद करने की कोशिश की है ताकि वह देश के लोगों की जरूरतों का ख्याल रखा जा सके।
  • फंड ट्रांसफर से आरबीआई को अपनी कमाई को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।

आरबीआई की कमाई

  • आरबीआई के पास कई रास्ते हैं जिससे कमाई होती है, जिसमें विदेशी मुद्रा आस्तियां (Foreign currency assets), जो अन्य केंद्रीय बैंकों के बांड और ट्रेजरी बिलों या उच्च प्रतिभूतियों और अन्य केंद्रीय बैंकों के पास जमा के रूप में हो सकती है।
  • इसके अलावा सरकारी बॉन्ड्स और सिक्योरिटिज़ को अपने पास रखने पर केंद्रीय बैंक ब्याज लेता है। वहीं बैंकों को जरूरत के हिसाब से रातोंरात उधार देकर भी इसे आरबीआई अपने कमाई के हिस्से के रूप में जोड़ता है।
  • राज्य सरकारों और केंद्र सरकार को उधारी देकर भी कमिशन के रूप में आरबीआई कमाई करता है।

आरबीआई के खर्च

  • करेंसी नोटों की छपाई और कर्मचारियों पर होने वाले खर्च आरबीआई के प्रमुख खर्चों में शामिल है। साथ ही कमीशन के अलावा यह सरकार की ओर से देशभर के बैंकों को उधार देता है।

चिंताएं

  • वित्तीय संकट के दौरान बैंकों की प्रमुख रूप से मदद करने के लिए आरबीआई की बैलेंस शीट पर्याप्त रूप से मजबूत होनी जरूरी है।
  • यह ध्यान रखा जाना चाहिए कि भारत एक कम सॉवरेन रेटिंग वाला देश है और ऐसे में रिजर्व करेंसी को निकालना सरकार का जोखिम किसी उन्नत अर्थव्यवस्था के लिए सुरक्षित कदम साबित नहीं हो सकता।

अन्य केंद्रीय बैंक अधिशेष के हस्तांतरण का प्रबंधन कैसे करते हैं?

  • यूके और यूएस दोनों में केंद्रीय बैंक सरकार के साथ परामर्श के बाद निर्णय लेते हैं।
  • लेकिन जापान में यह सरकार ही तय करती है। कुल मिलाकर, कुछ अपवादों को छोड़कर अधिशेष हस्तांतरण की मात्रा का औसत सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 5% है।

निहितार्थ

  • बैंक पुनर्पूंजीकरण (recapitalization)
  • यह आर्थिक मंदी को देखते हुए सरकार को बड़े पैमाने पर बैंक पुनर्पूंजीकरण के लिए मदद करेगा, खासकर तब, जब वाणिज्यिक बैंकों द्वारा पूंजी की कमी के कारण ऋण वितरण के रास्तों को बंद कर दिया जाता है।
  • अर्थव्यवस्था को गति देना
  • आरबीआई से अतिरिक्त अधिशेष का हस्तांतरण सरकार को बजट अनुशासन बनाए रखते हुए अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने में सक्षम बना सकता है।
  • अतिरिक्त फंड सरकार को किसी भी राजकोषीय प्रोत्साहन पैकेज में अधिक निवेश करने की अनुमति देगा, जिसे वह आर्थिक मंदी से निपटने के लिए आगे बढ़ाना चाहेगी।

राजकोषीय घाटा लक्ष्य

  • राजस्व की कमी की स्थिति में सरकार प्रमुख क्षेत्रों में खर्च को कम किए बिना राजकोषीय घाटे के लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम होगी।
  • यह सरकार को आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए संरचनात्मक सुधारों को लागू करने के लिए आवश्यक वित्तीय स्थान प्रदान करेगा।

आगे का रास्ता

  • आरबीआई बोर्ड के फैसले की सराहना की जानी चाहिए, क्योंकि इससे सरकार को आर्थिक मंदी से निपटने और राजकोषीय लक्ष्यों का पालन करने में मदद मिलेगी।
  • उम्मीद है कि सरकार इन फंडों का समझदारी से इस्तेमाल करेगी।
  • दूसरी ओर, आरबीआई का लाभांश कदम रामबाण नहीं है। संभावित विकास को बढ़ावा देने के लिए, भारत की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है।

प्रश्न

आरबीआई द्वारा हाल ही में सरकार को अधिशेष हस्तांतरण के परिणामों की गंभीर रूप से जांच कीजिए। क्या यह अर्थव्यवस्था की रिकवरी में मदद करेगा, जो वर्तमान में मंदी का सामना कर रही है?