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2025 तक चीन से भी आगे निकलकर भारत बन जाएगा सबसे बड़ी आबादी वाला देश- चीन की आबादी में गिरावट

India to takeover China to become Most Populated Country by 2025 – China’s population declines

प्रासंगिकता

  • जीएस 2 || शासन और सामाजिक न्याय || मानव विकास || जनसंख्या

सुर्खियों में क्यों?

2011 की जनगणना के अस्थायी आंकड़ों के मुताबिक, भारत 2025 तक जनसंख्या के मामले में चीन से भी आगे निकल जाएगा।

विवरण

  • नवीनतम आंकड़ों की मानें तो चीन को सबसे बड़ी आबादी के मामले में भारत जल्द ही पीछे छोड़ देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा।
  • भारत की प्रजनन दर लगभग 2.3 बनी हुई है, जो स्पष्ट करती है कि इसकी जनसंख्या 2023 या 2024 तक चीन को पार कर जाएगी।
  • 2020 तक के दशक में, चीन की जनसंख्या 1950 के दशक के बाद से सबसे धीमी दर से बढ़ी, जो पड़ोसी देश दक्षिण कोरिया और जापान में देखी गई प्रवृत्तियों को दर्शाती है।
  • फिलहाल चीन की आबादी 141.2 करोड़ है, जिसकी जनसंख्या दर लगातार चौथे वर्ष गिर रही है।

संयुक्त राष्ट्र का अनुमान

  • संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि 2030 के बाद चीन की जनसंख्या में गिरावट शुरू हो जाएगी, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह अगले एक या दो वर्षों में ही हो देखने को मिल जाएगा।

2050 और 2100 तक भारत की प्रजनन दर

  • चूंकि प्रत्येक अभिभावक को ज्यादा से ज्यादा दो ही बच्चे होने चाहिए, इसलिए जनसंख्या घट जाएगी।
  • इसी मॉडल में, भारत की अनुमानित प्रजनन दर 1.29 होगी, जो कि अमेरिका की तुलना में 1.53 और फ्रांस के लिए 1.78 प्रजनन दर है।
  • IHME के मानें तो 2050 तक आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के लगभग बराबर हैं।
  • IHME और संयुक्त राष्ट्र ने भारत की जनसंख्या 2050 तक 1.64 बिलियन और 2048 तक 1.61 बिलियन तक पहुंचने की उम्मीद जताई है।
  • दोनों का अनुमान इस सदी के दूसरे हाफ में थोड़ा बदल जाता है– संयुक्त राष्ट्र ने 2100 तक 1.45 बिलियन की आबादी और IHME ने 1.09 बिलियन की भविष्यवाणी की है।

प्रजनन दर को प्रभावित करने वाले कारक

  • प्रजनन क्षमता काफी हद तक सामाजिक तानेबाने और कार्यक्रम की ताकत पर निर्भर करती है।
  • राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण हमें 12.9 प्रतिशत की अधूरी आवश्यकता और भारत के लिए 53.5 प्रतिशत गर्भनिरोधक प्रसार का अनुमान प्रदान करता है।
  • महिला शिक्षा एक सामाजिक तानेबाने के लिए प्रमुख संकेतक के रूप में काम करता है, महिला शिक्षा का स्तर जितना अधिक होगा, प्रजनन क्षमता उतनी ही कम होगी।
  • चूंकि प्रजनन आयु वर्ग में महिलाओं की साक्षरता में तेजी से सुधार हो रहा है, इसलिए हम निरंतर प्रजनन क्षमता में कमी के बारे में आशावादी हो सकते हैं।

कुल प्रजनन दर

  • एक पीढ़ी के रूप में खुद को पूरी तरह से बदलने के लिए, प्रतिस्थापन-स्तर (Replacement level) की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) को 2.1 माना गया है, जो एक महिला के लिए आवश्यक बच्चों की औसत संख्या का प्रतिनिधित्व करता है। अध्ययन में, वैश्विक टीएफआर 2017 में 2.37 से 2100 में 1.66 तक लगातार घटने का अनुमान है।
  • 183 देशों में टीएफआर के 2.1 से नीचे गिरने का अनुमान है। वहीं, जापान, थाईलैंड, इटली और स्पेन सहित 23 देशों में इसके 50% से अधिक गिरने का अनुमान है।

प्रवृत्तियां

  • भारत को सदी के अंत तक (2019 और 2050 के बीच) (1.37 बिलियन की अनुमानित आबादी के साथ) दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बने रहने का अनुमान है, इसके बाद चीन, नाइजीरिया, अमेरिका और पाकिस्तान का नंबर आएगा।
  • अमेरिका में भी जन्म दर घटकर 1.6 रह गई है, जो रिकॉर्ड स्तर पर सबसे कम दर्ज की गई है।
  • 1950 के बाद से सबसे धीमी- चीन में जनसंख्या वृद्धि दर 1953 के बाद से सबसे धीमी देखने को मिली है।
  • प्रजनन दर में गिरावट-1970 के दशक के बाद से लागू ‘वन चाइल्ड पॉलिसी’ को 2016 में हटाने के बाद भी चीन की प्रजनन दर घट रही है।

चीन की प्रतिस्थापन दर

चीन की प्रजनन दर गिरकर 1.3 हो गई है, जो एक पीढ़ी के लिए आवश्यक 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से काफी नीचे है।

  • एशिया और पश्चिम
    • चीन की धीमी जनसंख्या वृद्धि एशिया और पश्चिम के कई देशों में देखी जाने वाली प्रवृत्ति का हिस्सा है। पिछले साल, दक्षिण कोरिया ने इतिहास में पहली बार अपनी जनसंख्या में गिरावट देखी। वहीं अमेरिका में भी, जन्म दर घटकर 1.6 रह गई है, जो रिकॉर्ड में सबसे कम है।

वैश्विक डेटा

  • दुनिया की आबादी 2064 में लगभग 9.7 बिलियन लोगों के चरम पर पहुंचने और सदी के अंत तक गिरकर 8.8 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है, 23 देशों में जापान,थाईलैंड, इटली और स्पेन सहित आबादी में 50% से अधिक की कमी देखी जा रही है।
  • 2100 तक 195 देशों में से कुल 183 में टीएफआर प्रति महिला 2.1 जन्म के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे होगा।
  • वैश्विक टीएफआर 2017 में 37 से लगातार गिरकर 2100 में 1.66 हो जाने का अनुमान है, जो कि 2.1 की न्यूनतम दर से काफी कम है।

चिंता

  • जब किसी देश में युवा आबादी में गिरावट आती है, तो यह श्रम की कमी पैदा होने का संकेत देता है, जिसका अर्थव्यवस्था पर एक बड़ा हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
  • अधिक वृद्ध लोगों के होने से किसी भी देश के स्वास्थ्य देखभाल और पेंशन की मांग बढ़ सकती है, देश की सामाजिक खर्च प्रणाली पर और अधिक बोझ पड़ सकता है। इस दौरान कम लोग काम कर रहे होते हैं और इसमें योगदान दे रहे होते हैं।

चुनौतियों

  • नए जनसांख्यिकीय अनुमान “निरंतर” वैश्विक विकास के संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या प्रभाग (यूएनपीडी) के कार्यक्रमों के विपरीत हैं।
  • हम घटते कार्यबल के आर्थिक विकास के लिए प्रमुख बाधाओं का वर्णन करते हैं, स्वास्थ्य और सामाजिक समर्थन प्रणालियों पर उम्र बढ़ने वाली आबादी का भारी दबाव बढ़ता है।
  • जब देश प्राथमिकता वाले विकास की ओर बढ़ते हैं, तो प्रजनन क्षमता की आसन्न आवश्यकता होती है।

चीन के लिए अनोखी समस्या

  • हालांकि, घटती आबादी विकसित देशों के विपरीत इस प्रवृत्ति का हिस्सा है, यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के बावजूद अभी भी एक मध्यम आय वाला समाज है।
  • जापान और जर्मनी जैसे समृद्ध देश, जो समान जनसांख्यिकीय चुनौतियों का सामना करते हैं, वे कारखानों, प्रौद्योगिकी और विदेशी संपत्तियों में निवेश पर निर्भर हो सकते हैं। हालांकि, चीन अभी भी श्रम प्रधान विनिर्माण और खेती पर निर्भर है।
  • जनसांख्यिकीय लाभांश में गिरावट इस प्रकार चीन और भारत जैसे अन्य विकासशील देशों को समृद्ध दुनिया की तुलना में अधिक नुकसान पहुंचा सकती है,

चीन की वन चाइल्ड पॉलिसी

  • इसको माल्थुसियन के विचार के तहत अपनाया गया था, जिसके अनुसार अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि से आर्थिक और पर्यावरणीय तबाही होगी। इसमें भोजन की कमी के बारे में चिंताओं का भी जिक्र है।

प्रभावशीलता

  • यह जनसंख्या की समस्या को कम करने में मदद करता है।
  • इसे कुछ परिवारों द्वारा व्यावहारिक के रूप में देखा जाता है।
  • यह गरीबी दर को कम करता है।
  • संक्षेप में इसने जनसंख्या में 400 मिलियन की कमी ला दी।
  • लेकिन, यह बच्चो का विस्फोट (Baby boom) करने में विफल रहा। जब इसकी घोषणा की गई तब 11 मिलियन कपल्स दूसरे बच्चे को जन्म देने कि लिए तैयार थे।
  • यह आंकड़ा कभी सफल नहीं हुआ, क्योंकि केवल 700,000 जोड़ों ने नई व्यवस्था को अपनाया था और केवल 620,000 को ही परमिट दिया गया था। दूसरे शब्दों में, आने वाले वर्षों में चीन एक बड़े जनसांख्यिकीय मुद्दे का सामना कर रहा है। उनके पास वृद्धोन्मुखी आबादी है जहां 2030 तक एक चौथाई आबादी 60 से अधिक वर्ष की हो जाएगी।

आगे का रास्ता

  • भारत जनसांख्यिकीय परिवर्तन के सही ओर खड़ा है, यदि नीति निर्माता विकास नीतियों में इस बदलाव से सहमत होते हैं तो अपने तीव्र सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक सुनहरा अवसर प्रदान कर सकता है।
  • यदि बढ़ा हुआ कार्यबल पर्याप्त रूप से योग्य, प्रशिक्षित और लाभकारी रोजगार नहीं दिया गया तो भारत जनसांख्यिकीय तबाही का सामना करेगा।
  • घटती कामकाजी उम्र की आबादी के संभावित विनाशकारी प्रभावों को देशों द्वारा संबोधित किया जाना चाहिए।

टीएफआर में सुधार

  • सुझाए गई पहलों में शामिल हैं- उदाहरण के लिए, टीएफआर में सुधार के लिए प्रोत्साहन और आत्मनिर्भरता के मार्ग के रूप में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग।
  • महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के अधिकारों पर प्रजनन क्षमता में कमी के प्रभावों को अधिक से अधिक आर्थिक स्वतंत्रता द्वारा संतुलित किया जाना चाहिए।
  • यह महिलाओं को सिस्टम के साथ अपनी शर्तों पर बातचीत करने और अधिक सहायता सेवाओं के लिए भी अनुमति देगा।

अन्य देशों से सीखें

  • जापान और कोरिया जैसे देशों से वैश्विक रणनीतियों से सीखकर और घरेलू चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए समाधान विकसित करके, भारत लाभ उठा सकता है।
  • स्कूली शिक्षा, कौशल निर्माण और स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान केंद्रित करके परिवर्तन का लाभ उठाने के लिए मानव पूंजी में उचित निवेश की आवश्यकता है।

प्रश्न

भारत के 2027 तक दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले देश के रूप में चीन से आगे निकलने का अनुमान है। बढ़ती आबादी की चुनौतियों पर चर्चा कीजिए और आगे का रास्ता सुझाइए।

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