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आईएसआईएस बम ब्लास्ट में मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद घायल

Former Maldives President Mohamed Nasheed injured in ISIS-led bomb blast

प्रासंगिकता

  • जीएस 3 || सुरक्षा || आतंरिक सुरक्षा खतरे || आतंकवाद ||

सुर्खियों में क्यों?

आतंकी हमले में मालदीव की संसद के अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद बुरी तरह से घायल हुए हैं, जिनकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है।

मुद्दा

मालदीव नियमित राजनीतिक उथल-पुथल से ग्रस्त है।

  • 30 सालों के निरंकुश शासन के बाद देश के पहले बहुदलीय चुनावों में नशीद 2008 में मालदीव के पहले लोकतांत्रिक रूप से चुने जाने वाले नेता थे।
  • साथ ही, 2015 में नशीद को आपराधिक न्यायालय के न्यायाधीश को गिरफ्तार करने के लिए मालदीव के आतंकवाद विरोधी अधिनियम के तहत दोषी ठहराया गया था। नशीद एमनेस्टी इंटरनेशनल के कैदी हैं, जिन्हें 13 साल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, उन्होंने इसे ‘राजनीति प्रेरित’ माना था।
  • हालांकि, मालदीव सरकार ने चरमपंथ पर शिकंजा कसा है और इस्लामिक उपदेशों पर नजर रखने का काम किया है। पिछले कुछ सालों में यहां हिंसा कम हुई है। हालांकि, 2007 में माले में एक बम विस्फोट से एक दर्जन विदेशी पर्यटक घायल हो गए थे।
  • हालिया घटना को देखा जाए तो इस्लामिक स्टेट (IS) ने 2020 में नाव पर आगजनी का दावा किया था, हालांकि, इसके कोई ठोस सबूत नहीं मिले थे।

आईएसआईएस (ISIS) क्या है?

  • आईएसआईएस एक प्रोटो-स्टेट आतंकवादी नेटवर्क है, जिसे इराक में अल-कायदा नामक एक आतंकी समूह ने शुरू किया था।
  • इसे अबु मुसाब अल-जरकावी नामक जॉर्डन के एक आतंकवादी ने शुरू किया था और 2003 में इराक में इसने पकड़ की शुरुआत की थी।
  • 2014 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस्लामिक स्टेट चर्चा में आया जब, उसने इराका और सीरिया के बड़े हिस्सों को अपने कब्जे में कर लिया।
  • यह आतंकी संगठन सामूहिक हत्याओं के लिए कुख्यात है, जिसमे अपहरण से लेकर सिर कलम जैसी बर्बता शामिल है।

आईएसआईएस के लक्ष्य

  • अपनी सरकार की स्थापना- आईएस ने दुनिया भर के अन्य जिहादी संगठनों से कहा है कि वे इसके वर्चस्व को पेश करें। अल-कायदा की कई अन्य शाखाएं भी इस पर काम कर रही है।
  • आईएस पृथ्वी पर इस्लामिक स्टेट की स्थापना के ख्वाब देखता है और दुनिया में मुस्लिम विश्वास या उमा का बचाव करता है। इसने काफिरों और धर्मत्यागियों के खिलाफ और अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ टकराव की संभावना को स्वीकार किया है।
  • इस्लामिक कानून की स्थापना- जून 2014 में, इस संगठन ने औपचारिक रूप से एक “खलिफा” की स्थापना की घोषणा की, जिसका मकसद है पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को इस्लामिक और शरिया कानून का पालन करवाना।
  • आईएस ने कई शहरों में शरिया कानून लागू करना शुरू कर दिया है। उनके अनुसार, स्कूल में लड़कों और लड़कियों को अलग होना चाहिए; सार्वजनिक रूप से महिलाओं को बुर्का या पूरे घूंघट में होना चाहिए।

आईएस का विस्तार

  • मिडिल ईस्ट प्रमुख ठिकाना: इसमें लेवंट से उत्तरी अफ्रीका और काकेशस तक कट्टरपंथी इस्लामी चरमपंथी शामिल हैं, लेकिन मिडिल ईस्ट में अब यह अपने विस्तार कर रहा है। यह संगठन वैश्विक स्तर पर पूरे जोर के साथ लड़ने के लिए तैयार है।
  • अंतररष्ट्रीय रूप से मान्यता प्राप्त- इस्लामिक स्टेट ने जून 2014 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया जब उसने इराक के दूसरे सबसे बड़े क्षेत्र मोसुल पर कब्जा कर लिया और इराक और सीरिया को घेरने वाले एक खिलाफा की घोषणा की।
  • सीरिया के रक्का (Ar Raqqah) में आईएस की वास्तविक राजधानी है, लेकिन इसकी शाखाएं और समर्थक दुनियाभर में है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है।
  • विभिन्न तेल पाइपलाइनों और रिफाइनरियों को आईएस द्वारा पहले से ही कब्जा किया हुआ है।
  • आईएसआईएस की योजना अगले पांच साल तक दुनिया के कई बड़े हिस्सों को अपने कब्जे में लेना है, जिसमें लगभग पूरा भारतीय उपमहाद्वीप भी शामिल है।

भारत और आईएस

  • आईएसआईएस भारत के खिलाफ आतंकवाद का केंद्र बन सकता है, जिससे उसकी छत्रछाया में विभिन्न समूहों की संयुक्त ऊर्जा केंद्रित होगी।
  • पाकिस्तान से समर्थन: इसे पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) द्वारा समर्थित किया जा सकता है, जिससे कि भारत में इस संगठन को कई खुफिया और लॉजिस्टिक नेटवर्क बताने में मदद मिल सकता है।
  • हाल ही में, इस्लामिक स्टेट ने अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर जमीन जब्त की है और वे अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक पैर अपनी नजर गढ़ाए हैं।
  • इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस्लामी राज्य का खतरा वस्तुतः हमारी सीमाओं पर दस्तक दे रहा है।

आईएस के लिए भारत क्यों हैं एक कठिन रास्ता

  • भारत में कई युवा मुसलमानों के कट्टरपंथी होने के कुछ मामले सामने आए हैं, लेकिन फिलहाल यह बड़े पैमाने पर खतरा नहीं है।
  • भारत की बहुलतावादी संस्कृति
  • भारत एक बहुसांस्कृतिक, बहु-जातीय, बहु-संप्रदायी समाज वाला देश है, जो कई प्रकार के विविधताओं से भरा है।”
  • भारतीय मुसलमानों द्वारा चरमपंथी सिद्धांत और कार्रवाई की अस्वीकृति के परिणामस्वरूप भारत की अनूठी समकालिक परंपराएं हैं, जिन्होंने असाधारण रूप से बहुलवादी संस्कृति को बढ़ावा दिया है।
  • भारतीय बाहुबलियों से ज्यादा समर्थन नहीं
  • दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी भारत में आईएस समर्थकों की संख्या में कमी आई हैं क्योंकि:
  • भारतीय मुस्लिम विद्वानों ने हमेशा इस्लामिक स्टेट और अन्य “चरमपंथी हिंसक समूहों” द्वारा इस्तेमाल किए गए धर्मग्रंथों की “भ्रष्ट व्याख्या” की निंदा की है।
  • जैसा कि भारतीय इस्लाम प्रकृति में समकालिक है, इसलिए आईएस जैसे आतंकी संगठनों को भारतीय मुसलमानों के बीच लोकप्रिय बनना मुश्किल है।

आईएसआईएस का मुकाबला करने वाली दुनिया

  • इस्लामिक स्टेट की आंतरिक खामियों का फायदा: पश्चिम और उसके सहयोगियों को इस्लामिक स्टेट की आंतरिक खामियों का फायदा उठाना चाहिए।
  • जिहादी समूह को भीतर से कमजोर करने के लिए, उन्हें उन बाधाओं का सामना करना होगा।
  • हवाई हमलों से परे: इस्लामिक स्टेट के खिलाफ हवाई सैन्य कार्रवाई से ऊपर उठने की जरूरत है।
  • इसे अमेरिका के साथ सहयोग करने वाले सीरियाई और इराकी सैन्य समूहों द्वारा ग्राउंड ऑपरेशन को भी एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल किया जाना चाहिए।
  • सीरिया में उदारवादी विपक्ष का समर्थन करें: पश्चिम और उसके सहयोगियों को सीरिया में उदारवादी विपक्ष की संगठनात्मक और तार्किक क्षमताओं को सुदृढ़ करना चाहिए।
  • दक्षिणी मोर्चे पर फ्री सीरियन आर्मी एकमात्र उदार विपक्षी गठबंधन है, जिसमें शासन की क्षमताएं हैं।
  • सीरिया में यह समूह इस्लामिक स्टेट और तानाशाही दोनों से जूझ रहा है।
  • एक इराकी राष्ट्रीय रक्षक की स्थापना करें: एक बहु-संप्रदाय, बहुजातिय बल राज्य की संस्थाओं में सुन्नी समुदाय में विश्वास पैदा करने और इस्लामिक स्टेट के खिलाफ लड़ाई में स्थानीय भागीदारी को व्यापक बनाएगा।
  • तुर्की के साथ जुड़ाव: तुर्की को अंतरराष्ट्रीय गठबंधन के विमानों को तुर्की के ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति देनी चाहिए, जो उन्हें सीरिया के अंदर लक्ष्यों तक पहुंचने में बेहतर बनाएगा।
  • सीरिया संघर्ष का एक राजनीतिक समाधान खोजें: पश्चिम और उसके सहयोगियों को सीरिया संघर्ष के राजनीतिक समाधान के बारे में बातचीत शुरू करनी चाहिए।
  • किसी एक के द्वारा इस्लामिक स्टेट को हराया नहीं जा सकता है, इसलिए सीरिया में एक प्रस्ताव लाया गया है।

क्या वास्तव में सहयोगी बलों द्वारा आईएस को खत्म कर दिया जाएगा

  • अल-बगदादी के बाद आईएस
  • बगदादी की मौत के बाद आईएस के प्रभाव कम होने की प्रबल संभावना है।
  • इसके विपरीत, जमीनी हकीकत यह भी बताती है कि आईएसआईएस की जड़ें उपमहाद्वीप के सबसे दूर के स्थानों तक फैल गए हैं, जहां तक ​​कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देश जैसे फिलीपींस, म्यांमार, आदि हैं।
  • बगदादी के बाद खिलाफा कमजोर हो सकता है, लेकिन उसने एक लचीला नौकरशाही संगठन बनाया है, जो मौत हो चुके आईएस लीडर के बाद स्थितियों को देख पाएंगे।
  • निश्चित रूप आईएस कमजोर हुआ लेकिन गिरावट नहीं आयी
  • दूसरी ओर बघौज (सीरिया में एक इलाका) में आईएस की मुक्ति या उनके खलिफा के खात्मे को इस आंतकी संगठन का अंत नहीं माना जाना चाहिए।
  • स्लीपर सेल्स की उपस्थिति
  • इसने विशेष रूप से सीरिया और इराक में स्लीपर सेल का गठन किया है, जिसने कमजोर होते आईएस के इलाकों पर भी आतंकी हमलों का इंतजाम किया है।
  • दूसरी ओर, स्लीपर सेल की उपस्थिति, आतंकी समूहों के लिए जमीन हासिल करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती है।
  • पश्चिम एशिया में अस्थिर राजनीति: पश्चिम एशिया में अनुभव के अनुसार एक अनिश्चित आंतरिक सुरक्षा स्थिति, आतंकवाद को बढ़ावा देने का काम करती है।
  • सीरिया से अमेरिका की वापसी: सीरिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी से इस क्षेत्र में एक बार फिर से अराजकता की स्थिति पैदा हो सकती है।

आगे का रास्ता

  • आतंकवाद से लड़ने वाले देशों के लिए यह आवश्यक है कि वे अपने मतभेदों से अधिक बारीकी से सीखें, बजाय अनुभव से सामान्यीकरण करने के।
  • वैश्विक आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक केंद्र बनना चाहिए। ऐसे में, आतंकवाद की एक आम परिभाषा के आधार पर अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन पर सहमति होनी चाहिए।
  • देशों के बीच खुफिया साझेदारी को मजबूत करने की जरूरत है और वर्तमान में वैश्विक आतंकवाद से प्रभावित देशों को खतरे को गंभीरता से लेने की जरूरत है।
  • भारत को खुफिया सहयोग प्रदान करना चाहिए क्योंकि यह वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ युद्ध है।

निष्कर्ष

  • आंतकवादियों को मारने के बजाय आईएसआईएस की विचारधारा का मुकाबला करने और आंतकवाद को जड़ से खत्म करने पर फोकस किया जाना चाहिए।
  • आईएसआईएस संचालन की वर्तमान स्थिति और भारत सहित दुनिया भर के युवाओं को लुभाने की इसकी क्षमता का गंभीर रूप से विश्लेषण करें।

प्रश्न

आईएसआईएस संचालन की वर्तमान स्थिति और भारत सहित दुनिया भर के युवाओं को लुभाने की इसकी क्षमता का गंभीर रूप से विश्लेषण करें।