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वेन हेल्थ दृष्टिकोण क्या है? खाद्य सुरक्षा और जूनोटिक रोगों का नियंत्रण

What is One Health Approach? Food safety and control of zoonotic diseases

प्रासंगिकता:

  • जीएस 2 || शासन और सामाजिक न्याय || मानव विकास || स्वास्थ्य

चर्चा में क्यों?

  • वन हेल्थ दृष्टिकोण कई प्रकार की योजनाओं के कार्यन्वित करने का तरीका है, जिसमें, जिसमें कई क्षेत्र बेहतर सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों को प्राप्त करने के लिए एक साथ संचार और काम करते हैं।
  • वन हेल्थ योजना में खासकर खाद्य सुरक्षा और जूनोटिक रोगों के नियंत्रण (ऐसे रोग जो जानवरों और मनुष्यों के बीच फैल सकते हैं, जैसे फ्लू, रेबीज और रिफ्ट वैली फीवर) पर फोकस किया जाता है।
  • हालांकि, भारत में वन हेल्थ मॉडल का एक प्रचलित उदाहरण वर्ष 1950 के दशक के उत्तरार्द्ध में ‘क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़’ (Kyasanur Forest Disease-KFD) से निपटने में देखा गया था।

जूनोटिक रोग

  • वे रोग, जो जानवरों से मनुष्यों तक पहुंचते हैं, उन्हें जूनोटिक रोगों के रूप में जाना जाता है।
  • वे दुनिया भर में 60% से अधिक उभरती संक्रामक बीमारियों की वजह जूनोटिक है।
  • मनुष्यों और जानवरों के बीच उभर रहे रोगजनकों की वजह प्राकृतिक पर्यावरण के विनाश, वैश्वीकृत व्यापार और यात्रा तथा औद्योगिक खाद्य उत्पादन प्रणालियां जिम्मेदार है।

भारत और वन हेल्थ दृष्टिकोण

  • 1950 के दशक में वन हेल्थ दृष्टिकोण ने COVID-19 की तुलना में ज्यादा खतरनाक रक्तस्रावी बुखार क्यासानूर फॉरेस्ट डिजीज ( kyasanur Forest Disease Symptoms) के लक्षण को खोजने में मदद की थी।
  • हालांकि, इसके साथ कई अन्य संगठनों ने भी काम किया था, जिनमें वायरस रिसर्च सेंटर (जिसे अब नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के रूप में जाना जाता है) पुणे, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी आदि शामिल थे।
  • वर्ष 2018 में निपाह वायरस के प्रकोप से निपटने के लिये केरल सरकार ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में वन हेल्थ आधारित ‘केरल मॉडल’ का सफलतापूर्वक प्रयोग किया।
  • इस सफलता का श्रेय मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे और राजनीतिक इच्छाशक्ति को जाती है, जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक टीम से मदद लेकर इसे सफल बनाया।
  • हालांकि, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ भारत में वन हेल्थ अनुसंधान करने के लिए विनियामक ढांचे को आमतौर पर कई अधिकारियों से अनुमोदन की आवश्यकता है।
  • यह संक्रामक रोगों से उभरते खतरों का तेजी से जवाब देने की देश की क्षमता को बाधित करता है।

जैव विविधता और मानव कल्याण पर राष्ट्रीय मिशन

  • मिशन का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और संबंधित आपदाओं को कम करने के प्रयासों के साथ, स्वास्थ्य, आर्थिक विकास, कृषि उत्पादन और आजीविका उत्पादन के क्षेत्रों में जैव विविधता विज्ञान और मानव कल्याण के बीच उपेक्षित संबंधों का पता लगाना है।
  • यह ‘क्यासानूर फॉरेस्ट डिज़ीज़ वायरस (KFDV), Flaviviridae वायरस परिवार के एक सदस्य के कारण होता है।
  • इसकी पहचान सर्वप्रथम 1957 में कर्नाटक के क्यासानूर वन में एक बीमार बंदर में हुई थी। तब से, प्रति वर्ष 400-500 के बीच मानव मामलों की रिपोर्ट की गई है।
  • KFDV भारतीय राज्य कर्नाटक के लिए एक स्थानीय बीमारी है। स्थानीय लोगों द्वारा इसे बंदर बुखार भी कहा जाता है।

निपाह वायरस का प्रकोप

  • निपाह वायरस संक्रमण एक प्रकार का वायरल संक्रमण है, जो निपाह वायरस से फैलता है।
  • यह वायरस एक नए जीनस जिसे हेनीपावायरस (सबफामिलि पैरामाइकोविराइने) कहा जाता है।
  • यह वायरस सामान्य रूप से विशिष्ट प्रकार के फलों के चमगादड़ों से फैलता है।
  • इस बीमारी की पहचान पहली बार 1998 में मलेशिया में फैलने के दौरान हुई थी, जबकि वायरस को 1999 में अलग कर दिया गया था।
  • इसका नाम मलेशिया के सुन्गाई निपाह गांव से पड़ा।

आगे का रास्ता

  • जिस तेजी के साथ नए रोगजनक उभर रहे हैं या पुराने रोग दुनिया भर में फिर से उभर रहे हैं, ये रोग अधिक पारदर्शिता, कॉलाबोरेशन, और एकीकृत राष्ट्रीय-स्वास्थ्य विज्ञान के लिए उन्नत राष्ट्रीय अवसंरचना और क्षमता के लिए खतरे की घंटी है।
  • भारत को प्रणालीगत और संस्थागत बाधाओं से निपटने की आवश्यकता है, जो एक एकीकृत वन हेल्थ जैसे ढांचे को चालू होने से रोकते हैं।
  • वन हेल्थ ढांचा सरकारी और निजी संस्थानों को कई प्रकार के विषयों में मदद करेगा। इससे जूनोटिक रोग से कैसे उभर सकते हैं और उनके क्या खतरे हो सकते है इसके बारे में जानकारी मिल सकेगी।

संदर्भ: