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सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली कैसे काम करती है? PFMS के उद्देश्य

Public Financial Management System how it works? Objectives of PFMS explained

प्रासंगिकता

  • जीएस 3 || अर्थव्यवस्था || सार्वजनिक वित्त || बजट

सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS)

  • इस यजोना को पहले केंद्रीय योजना निगरानी प्रणाली (CPSMS) के रूप में जाना जाता था।
  • यह वित्त मंत्रालय के लेखा महानियंत्रक (CGA) के कार्यालय द्वारा विकसित और कार्यान्वित एक वेब-आधारित ऑनलाइन सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है।
  • शुरू में इसे 2009 में योजना आयोग के केंद्रीय क्षेत्र योजना में स्थापित किया गया था

उद्देश्य

  • इसका उद्देश्य भारत सरकार की सभी योजनाओं के तहत जारी धनराशि को पर निगरानी करना और कार्यक्रम कार्यान्वयन के सभी स्तरों पर खर्च की वास्तविक समय पर रिपोर्टिंग करना था।
  • इसके बाद वर्ष 2013 में योजना और गैर-योजना दोनों योजनाओं के तहत लाभार्थियों को सीधे भुगतान को कवर करने के लिए दायरा बढ़ाया गया था।
  • 2017 में सरकार ने योजना और गैर-योजना व्यय के बीच अंतर को समाप्त कर दिया।
  • PFMS का प्राथमिक उद्देश्य कुशल सार्वजनिक निधि प्रबंधन प्रणाली के साथ-साथ एक भुगतान सह लेखा नेटवर्क की स्थापना कर भारत सरकार के लिए एक सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की सुविधा प्रदान करना है।
  • वर्तमान में, PFMS के दायरे में केंद्रीय क्षेत्र और केंद्र प्रायोजित योजनाएं और वित्त व्यय अनुदान सहित अन्य व्यय शामिल हैं।
  • भारत सरकार के डिजिटल इंडिया के हिस्से के रूप में PFMS एक वास्तविक समय, विश्वसनीय और सार्थक प्रबंधन सूचना प्रणाली और एक प्रभावी निर्णय समर्थन प्रणाली के साथ विभिन्न हितधारकों को सुविधा प्रदान करता है।
  • PFMS देश में कोर बैंकिंग प्रणाली के साथ एकीकृत है।

ई-कुबेर (E-Kuber)

  • ई-कुबेर भारतीय रिजर्व बैंक का मुख्य बैंकिंग समाधान है।
  • कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस (CBS) बैंकों के लिए समाधान के रूप में काम करता है जो सिंगल लोकेशन पर अपने कई ग्राहकों के लिए 24x7 सुविधा प्रदान करने में समर्थ नहीं होते हैं। यह रिटेल के साथ-साथ कॉर्पोरेट बैंकिंग गतिविधियों का भी समर्थन करना।
  • इस यह प्रकार केंद्रीकरण वित्तीय सेवाओं के लिए “वन-स्टॉप” की शॉप के रूप में काम करता है। CBS का उपयोग करके, ग्राहक अपने खातों को किसी भी शाखा से, कहीं भी, चाहे वे शारीरिक रूप से अपने खाते खोले हों, उन तक आसानी से पहुंच सकते हैं।
  • योजना व्यय: योजना के नाम पर किए गए सभी व्यय (अर्थात पंचवर्षीय योजनाएं) को योजना व्यय कहा जाता था।
  • उदाहरण के लिए बिजली उत्पादन, सिंचाई और ग्रामीण विकास, सड़कों, पुलों, नहरों आदि का निर्माण।
  • गैर-योजना व्यय: योजना व्यय के अलावा अन्य सभी व्यय को गैर-योजना व्यय के रूप में जाना जाता था।
  • उदाहरण के लिए ब्याज भुगतान, पेंशन, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को सांविधिक हस्तांतरण, आदि।

बजट- 2017 में लाया गया परिवर्तन

  • 1 फरवरी से देश का बजट शुरू हुआ
  • रेल बजट का आम बजट के साथ विलय हुआ
  • योजना और गैर-योजना व्यय के बीच की दूरी कम करना

डिजिटल इंडिया प्रोग्राम -विजन क्षेत्र

  • हर नागरिक की उपयोगिता के रूप में डिजिटल बुनियादी ढांचा
  • शासन और मांग पर सेवाएं
  • नागरिकों का डिजिटल सशक्तिकरण

डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के उद्देश्य

  • ज्ञान के रूप में भारत के भविष्य को तैयार करना।
  • परिवर्तन के रूप में आईटी (भारतीय प्रतिभा) + आईटी (सूचना प्रौद्योगिकी) = भविष्य का भारत तैयार करना
  • परिवर्तन को सक्षम बनाने के लिए प्रौद्योगिकी पर फोकल करना
  • इस अंब्रेला प्रोग्राम के तहत कई विभागों को कवर करना
  • यह कार्यक्रम एक साथ व्यापक स्तर पर इन आइडिया और विचारों को बुनने में मदद करता है, ताकि उनमें से प्रत्येक को एक बड़े लक्ष्य के हिस्से के रूप में देखा जा सके।
  • डिजिटल इंडिया कार्यक्रम खासकर उन कार्यक्रमों को अपनी तरफ आकर्षित करेगा जिन पर फिर से काम किया जाना हो और जिन्हें बेहतर तरीकों से लागू करना हो।

डिजिटल इंडिया के नौ स्तंभ

  • ब्रॉडबैंड हाईवे
  • मोबाइल कनेक्टिविटी के लिए यूनिवर्सल एक्सेस
  • सार्वजनिक इंटरनेट एक्सेस कार्यक्रम
  • ई-गवर्नेंस: प्रौद्योगिकी के माध्यम से सुधार सरकार
  • ई-क्रांति – सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी
  • सभी के लिए सूचना
  • इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण
  • नौकरियों के लिए आईटी
  • प्रारंभिक हार्वेस्ट कार्यक्रम

मॉडल प्रश्न

आप सार्वजनिक वित्त प्रबंधन प्रणाली से क्या समझते हैं और इसमें पारदर्शी और जवाबदेही बढ़ाने की क्षमता कैसी है? साथ ह, इसे अपनाने के बाद आने वाली चुनौतियों के बारे में विस्तार से बताइए।

संदर्भ: