Magazine

English Hindi

Index

Polity

Governance & Social Justice

International Relations

Economy

Economy

ओपन मार्केट ऑपरेशंस, RBI ने OMO के माध्यम से 10000 करोड़ रुपये की करेगा मदद

Open Market Operations explained, RBI decides to inject Rs 10000 crore liquidity via OMOs

प्रासंगिकता:

  • जीएस 3 || अर्थव्यवस्था || बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र || भारतीय रिजर्व बैंक

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों को खरीदकर बैंकिंग प्रणाली में 10,000 करोड़ रुपये की डालने का निर्णय लिया है।
  • Covid-19 के संक्रमण की वजह से देश का वित्तीय बाजार मुश्किलों का सामना कर रहा है।
  • RBI ने पहले 25,000 करोड़ रुपये दीर्घकालिक रेपो परिचालन (LTRO) के माध्यम से मदद करने का मन बनाया था।

प्रमुख बिंदु

  • ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) के तहत केंद्रीय बैंक सरकारी सिक्योरिटी और ट्रेजरी बिल की खरीद और बिक्री करते हैं। भारत में यह काम आरबीआई करता है।
  • आरबीआई जब अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति बढ़ाना चाहता है तो वह बाजार में सरकारी सिक्योरिटी खरीदता है।
  • वैसे ही जब उसे अर्थव्यवस्था में पैसे की आपूर्ति घटाने की जरूरत महसूस होती है तो वह बाजार में सरकारी सिक्योरिटी बेचता है। इससे सिस्टम में लिक्विडिटी (पैसा) घट जाती है।
  • यह एक प्रकार की मात्रात्मक (धन की कुल मात्रा को विनियमित या नियंत्रित करने के लिए) मौद्रिक नीति उपकरण है, जो देश के केंद्रीय बैंक द्वारा अर्थव्यवस्था में धन की आपूर्ति को नियंत्रित करने के लिए नियोजित की जाती है।

दीर्घकालिक रेपो परिचालन

  • LTRO के तहत, केंद्रीय बैंक प्रचलित रेपो दर पर बैंकों को एक साल से तीन साल की अवधि के लिये 1 लाख करोड़ रुपए तक का ऋण प्रदान करेगा।
  • जैसे-जैसे बैंकों को कम दरों पर दीर्घकालिक फंड मिलते हैं, तो उनके फंड की लागत गिरती जाती है। इसके बदले में वे उधारकर्ताओं के लिए ब्याज दरों को कम करते हैं।
  • LTRO RBI को यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि बैंक नीतिगत दरों को कम किए बिना, धन-आधारित उधार दर की अपनी सीमांत लागत को कम करें।

LTRO के उद्देश्य

  • मौजूदा बाजार की स्थितियों के सापेक्ष उचित लागत पर टिकाऊ लिक्विडिटी की उपलब्धता के बारे में बैंकों को आश्वस्त करना।
  • इसके अलावा बैंकों को उत्पादक क्षेत्रों में क्रेडिट प्रवाह को बढ़ाने के लिए परिपक्वता परिवर्तन (Maturity transformation) को सुचारू और निर्बाध रूप से करने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • परिपक्वता परिवर्तन तब होता है जब बैंक वित्त के अल्पकालिक स्रोतों को लेते हैं, जैसे कि बचतकर्ताओं से जमा, और उन्हें दीर्घकालिक उधार, गिरवी इत्यादि।

संदर्भ: