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राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को NJPC की सिफारिशों को लागू करने के लिए कहा

National Judicial Pay Commission, Apex Court asks States & UTs to implement recommendations of NJPC

प्रासंगिकता:

  • जीएस 2 || राजसत्ता || न्यायपालिका || उच्चतम न्यायालय

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में एक सुप्रीम कोर्ट बेंच ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (UT) को राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को स्पष्ट कर दिया है कि द्वितीय राष्‍ट्रीय न्‍यायिक वेतन आयोग द्वारा अधीनस्थ न्यायपालिका के लिये वेतन, पेंशन और भत्तों को लेकर की गई सिफारिशों को सक्रियता से लागू किया जाना चाहिये।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने 28 फरवरी, 2020 के अपने आदेश में कहा कि एक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर अधीनस्थ न्यायपालिका स्वतंत्र न्यायपालिका के अस्तित्व का आधार है।

दूसरा राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग

  • दूसरे राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग का गठन 2017 में अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गए आदेश का पालन करते हुए किया गया था।
  • इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस पी वेंकटराम रेड्डी करते हैं।

आयोग का उद्देश्य

  • पूरे देश में अधीनस्थ न्यायपालिका से संबंधित न्यायिक अधिकारियों के वेतन संरचना और नियमों को नियंत्रित करने वाले सिद्धांतों को विकसित करना।
  • राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में न्यायिक अधिकारियों की सेवाओं की वर्तमान संरचना और स्थितियों की जांच करना और सेवानिवृत्ति के बाद के लाभ जैसे पेंशन इत्यादि सहित उपयुक्त सिफारिशें करना।
  • एक स्वतंत्र आयोग द्वारा समय-समय पर अधीनस्थ न्यायपालिका के सदस्यों के वेतन और सेवा शर्तों की समीक्षा के लिए एक स्थायी तंत्र की स्थापना के बारे में सिफारिशें करना।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि आयोग जब चाहे सिफारिशों को अंतिम रूप दे सकता है और किसी भी मामले पर रिपोर्ट भेज सकता है।
  • आयोग को अपनी प्रक्रिया विकसित करने और कार्य को पूरा करने के लिए आवश्यक तौर-तरीकों को तैयार करने का अधिकार दिया गया है।

पहला राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग

  • पहला राष्ट्रीय न्यायिक वेतन आयोग अखिल भारतीय न्यायाधीश संघ मामले में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार 1996 में गठित किया गया था।
  • इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति के जगन्नाथ शेट्टी ने की थी।
  • इसे न्यायमूर्ति शेट्टी आयोग के रूप में भी संदर्भित किया गया था।
  • आयोग ने वर्ष 1999 में एक विस्तृत रिपोर्ट दी, जिसमें न केवल वेतन संरचना, भत्ते और न्यायिक अधिकारियों की सेवा की शर्तें, बल्कि न्यायालयों और न्यायिक प्रशासन से संबंधित विभिन्न अन्य पहलुओं को भी शामिल किया गया।

न्यायपालिका को स्वतंत्र बनाना

  • न्यायपालिका को कार्यपालिका और विधायिका से अलग करना
  • राष्ट्रपति द्वारा न्यायाधीशों की नियुक्ति
  • उच्च योग्यता
  • लंबा कार्यकाल
  • सेवा की सुरक्षा
  • उच्च वेतन
  • सेवानिवृत्ति के बाद अभ्यास का निषेध
  • अदालत की अवमानना ​​को दंडित करने की शक्ति
  • विशाल अधिकार क्षेत्र और न्यायिक समीक्षा की शक्ति

संदर्भ

https://www.thehindu.com/news/national/implement-pay-hike-for-subordinate-judiciary-proactively-supreme-court/article31023845.ece