Magazine

English Hindi

Index

Polity

Governance & Social Justice

International Relations

Economy

Polity

असम में विदेशी ट्रिब्यूनल , असम में FT के खिलाफ एमनेस्टी इंटरनेशनल के आरोप

Foreigners Tribunals in Assam, Amnesty International allegations against FTs in Assam explained

प्रासंगिकता

  • जी एस 2 || राजसत्ता || संवैधानिक ढांचा || नागरिकता

चर्चा में क्यों?

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल ने असम में विदेशी ट्रिब्यूनल (FTs) के कामकाज पर आरोप लगाए हैं।

विवरण

  • एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ‘डिजाइन टू एक्सक्लूज’ नामक से एक रिपोर्ट प्रकाशित की है, जिसमें कहा कि सुप्रीम कोर्ट और गुवाहटी उच्च न्यायालय ने FTs द्वारा असम में बनाए जा रहे नागरिकताहीन संकट के खिलाफ संज्ञान नहीं ले रही है।
  • इस संगठन ने माना कि असम में नागरिकता के अधिकार को निर्धारित करने वाले FT ने नागरिकों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया, उनकी प्रक्रियाओं को नियंत्रित किया और उन्हें मनमाने तरीके से लागू किया।
  • इस रिपोर्ट में भारत में राष्ट्रीयता के निर्धारण को नियंत्रित करने वाले मौजूदा विधायी शासन की समीक्षा का भी आह्वान किया है।

असम में विदेशी ट्रिब्यूनल

  • ट्रिब्यूनल एक अर्ध-न्यायिक निकाय हैं, जो यह निर्धारित करती है कि अवैध रूप से रहने वाला व्यक्ति “विदेशी” है या नहीं।
  • प्रत्येक व्यक्ति, जिसका नाम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की फाइनल लिस्ट में नहीं है, वह अपीलीय प्राधिकारी यानि फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल (FT) के सामने अपने मामले को उठा सकता है।
  • अपडेटेड NRC की लिस्ट से बाहर हुए 19.06 लाख लोगों के मामलों को संभालने के लिए विशेष रूप से विदेशी ट्रिब्यूनल की स्थापना की है।
  • विदेशियों अधिनियम 1946 और विदेशियों (ट्रिब्यूनल) के आदेश 1964 के प्रावधानों के तहत, केवल विदेशी ट्रिब्यूनल को किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार है।
  • असम पुलिस सीमा संगठन, राज्य पुलिस के एक विंग ने विदेशियों का पता लगाने का काम किया है, जो ट्रिब्यूनल के लिए तय करते हैं कि कौन विदेशी है और कौन नहीं।

विदेशी ट्रिब्यूनल सदस्य

  • प्रत्येक विदेश ट्रिब्यूनल सदस्य को समय-समय पर सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, विदेशी ट्रिब्यूनल अधिनियम 1941 और विदेशियों ट्रिब्यूनल आदेश 1984 के तहत नियुक्त किया जाता है।
  • इस निकाय में एक सदस्य असम न्यायिक सेवा का एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी हो सकता है, एक सेवानिवृत्त सिविल सेवक, जो न्यायिक अनुभव के साथ कम से कम सचिव या उप सचिव पद से नीचे नहीं रहा हो या एक कम से कम सात साल की प्रेक्टिसिंग एडवोकेट जिसकी उम्र कम से कम 35 साल हो।
  • एक सदस्य को असम (असमिया, बंगाली, बोडो और अंग्रेजी) की आधिकारिक भाषाओं का उचित ज्ञान होना आवश्यक है और साथ ही विदेशियों के मुद्दे के लिए ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के साथ बातचीत करना भी आवश्यक है।

इंटरनेशनल एमनेस्टी

  • इंटरनेशनल एमनेस्टी एक अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठन (NGO) है, जिसकी स्थापना 28 मई 1961 को लंदन में की गई थी।
  • यह सरकारों और अन्य संस्थाओं द्वारा मानवाधिकारों के हनन, खासकर नागरिकों को बोलने की आजादी या यातनाओं के खिलाफ उनके वैश्विक रिपोर्ट जारी करती है।
  • यह संगठन अंतरराष्ट्रीय कानून में मानवाधिकारों की सुरक्षा के विस्तार और लागू करने के लिए अंतर सरकारी मानवाधिकार निकायों के साथ भी काम करती है।
  • 1977 में इस अंतरराष्ट्रीय संगठन को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया।

असम में एनआरसी

  • असम एनआरसी का मुद्दा यह है कि 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में बड़े स्तर पर अवैध प्रवासियों ने असम में शरण ली थी।
  • इस विवाद ने अवैध प्रवासियों को निर्वासित करने के लिए 1979 से 1985 तक छह साल लंबे असम आंदोलन का नेतृत्व किया।
  • ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) ने उस आंदोलन का नेतृत्व किया जिसमें NRC को अपडेट करने और 1951 के बाद असम में प्रवेश करने वाले सभी अवैध प्रवासियों के निर्वासन की मांग की गई थी।
  • 1985 में असम समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए आंदोलन का समापन हुआ।
  • इसने 25 मार्च 1971 को अवैध प्रवासियों के निर्वासन की कट-ऑफ तारीख के रूप में निर्धारित किया।
  • चूंकि संविधान के 5 और 6 के तहत निर्धारित कट-ऑफ तारीख 19 जुलाई 1949 थी – नई तारीख को बल देने के लिए, नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन किया गया था और एक नया सेक्शन पेश किया गया था।
  • यह केवल असम में लागू किया गया था।
  • एनआरसी को अपडेट करने के लिए असम में AASU और अन्य संगठनों द्वारा कई बार रुक-रुक कर मांग देखी गई थी। इस दौरान असम स्थित एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में NRC पर एक याचिका भी दायर की थी।
  • दिसंबर 2014 में शीर्ष अदालत की एक खंडपीठ ने आदेश दिया कि NRC को समयबद्ध तरीके से अपडेट किया जाए।
  • 1951 का NRC और 1971 का इलेक्टोरल रोल (24 मार्च 1971 की आधी रात तक) दोनों को नागरिकों के विरासत डेटा के रूप में कहा जाता है। जो व्यक्ति या उनके वंशज इस डेटा का हिस्सा है, वे ही प्रमाणित रूप से भारतीय है।

संदर्भ: