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श्रीलंका के नागरिक शरणार्थी संशोधन अधिनियम 2019 से तमिल शरणार्थियों के लिए दोहरी नागरिकता

Dual citizenship for Tamil refugees from Sri Lankan, Citizenship Amendment Act 2019

प्रासंगिकता:

  • जीएस 2 || राजसत्ता || संवैधानिक ढांचा || नागरिकता

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पारित किया, जो कि भारत में रह रहे अवैध शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान करने का काम करेगा।
  • इस पारित अधिनियम ने श्रीलंका से आए तमिल शरणार्थियों के लिए दोहरी नागरिकता की मांग को जन्म दिया है।

भारत में श्रीलंकाई शरणार्थियों का आगमन

  • श्रीलंका से आए तमिलों को 1983 से पहले आने वालों और बाद में आने वालों में अलग किया जा सकता है।
  • 1983 के बाद वो लोग भारत में आए जब श्रीलंका अलगाववादी आंदोलन की हिंसक आग से जूझ रहा था, तब पूरे देश में तमिल विरोधी दंगों की विभिषिका देखी जा रही थी।
  • 1983 से पहले भारत पहुंचने वालों में ज्यादातर भारतीय मूल के तमिल थे, जिनके पूर्वज एक सदी पहले श्रीलंका चले गए थे।

वर्तमान स्थिति

  • श्रीलंका से आने वालों में से कुछ यूरोप के देशों की ओर यात्रा करने में सफल रहे।
  • कुछ अन्य लोगों ने भारतीयों से शादी की और उनकी पहचान के मुद्दों को हल किया।

तमिलनाडु के शिविरों में हालात

  • लगभग 19,000 श्रीलंकाई परिवार, जिनमें 60,000 व्यक्ति शामिल हैं और ये सभी तमिलनाडु के 107 शिविरों में रहते हैं।
  • इनमें से कुछ 10,000 कैदी 8 साल से कम उम्र के बच्चे हैं।
  • यहां पर ज्यादातर मामलों में एक एकल कमरा है, जो एक परिवार को आवंटित किया गया था जब यह 1983 या उसके बाद भारत पहुंचे थे।
  • शिविरों में 60,000 के अलावा, लगभग 30,000 श्रीलंकाई तमिल अपने दम पर रहते हैं।

श्रीलंकाइयों के लिए नागरिकता की स्थिति 

  • संवैधानिक और कानूनी पद स्पष्ट रूप से दोहरी नागरिकता के खिलाफ हैं।
  • आज तक, कोई भी भारतीय नागरिक किसी अन्य देश की नागरिकता नहीं रख सकता है।
  • केंद्र द्वारा भारतीय प्रवासी भारतीयों के वर्गों के लिए ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया योजना शुरू करने के लिए नागरिकता अधिनियम 2003 में संशोधन किया गया था।
  • यहां तक की उस दौरान भी दोहरी नागरिकता एक सीमित रूप में प्रदान की गई थी, जो बिना राजनीतिक अधिकारों के साथ और कृषि भूमि की खरीद भारत आए थे।

क्या सरकार दोहरी नागरिकता प्रदान करेगी?

  • इसमें कोई तर्क नहीं दिखाई देता, जो भारत के नागरिक नहीं है और दोहरी नागरिकता की मांग करते हैं।
  • केंद्र ने श्रीलंकाई शरणार्थियों के स्वैच्छिक प्रत्यावर्तन का लगातार समर्थन किया है।
  • वहां के जनसांख्यिकीय मिश्रण पर संभावित प्रभाव को देखते हुए, भारत उन पर भारतीय नागरिकता प्रदान करने के मूड में नहीं है।
  • हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारें शरणार्थियों को सहज बनाने के लिए बहुत कुछ करती हैं, लेकिन उनमें से अधिकांश को अवैध प्रवासी माना जाता है।
  • ऐसा इसलिए है क्योंकि वे बिना किसी वैध यात्रा दस्तावेजों के साथ पहुंचे हैं।

सरकार से उम्मीदें

  • शरणार्थियों को भारत की नागरिकता की उम्मीद है।
  • शिविरों में उन लोगों के पास श्रीलंका में कुछ भी नहीं बचा है, जिनके पास वापस जाने के लिए कोई संपत्ति या समुदाय नहीं है।

आगे का रास्ता

  • कई सारे शरणार्थी अपने घर श्रीलंका जाने के लिए तैयार हैं, लेकिन वहां की सरकार का समर्थन नहीं मिल रहा है। नई दिल्ली को चाहिए कि वह कोलंबो को इस बात के लिए किसी भी स्थिति में मनाए ताकि इन लोगों को अपनी जगह मिल सके।
  • इसके अलावा, दोनों देशों को स्वैच्छिक प्रत्यावर्तन में तेजी लाने के लिए संरचित सहायता की एक योजना तैयार करनी चाहिए, जो गृह युद्ध समाप्त होने के एक दशक बाद भी धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है।
  • इन कदमों से उन मुद्दों का स्थायी समाधान हो सकता है, जो 30 वर्षों से भारत में हैं।

अतिरिक्त जानकारी- नागरिकता संशोधन अधिनियम

  • यह अधिनियम हिंदू, सिख, पारसी, बौद्ध और ईसाई धर्म के के अवैध अप्रवासियों के लिए संशोधन की मांग करता है।
  • ये अप्रवासी पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के हो सकते हैं, जो भारत में बिना दस्तावेज के रहते हैं।
  • उन्हें छह साल में फास्ट ट्रैक भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी। अब तक 12 साल का निवास प्राकृतिककरण के लिए मानक पात्रता की आवश्यकता है।

संदर्भ: