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अर्थव्यवस्था

अर्थव्यवस्था बनाम पर्यावरण● न्यायमूर्ति एस ए बोबडे ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पटाखा उद्योग में काम करने वाले हजारों ग़रीब लोगों की नौकरियों को मारते हुए , उन्हें भुखमरी की ओर नहीं धकेल सकती।
● उन्होंने कहा कि अगर अदालत नौकरियों का सृजन नहीं कर सकती है, तो उसके आदेशों से आजीविका को समाप्त नहीं करना चाहिए। अदालत ने 23 अक्टूबर को अधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले और हानिकारक पटाखों के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया था।
घर से काम● सरकार आईटी क्षेत्र में कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों को वित्तीय प्रोत्साहन देकर घर से काम की नौकरियों को आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।
● यह आईटी / आईटीईएस उद्योग में रोज़गार के अवसर पैदा करेगा, विशेष रूप से महिलाओं और दिव्यांगों के लिए।
● यह पहल आईटी मंत्रालय की भारत बीपीओ उत्थान योजना के चरण II के रूप में शुरू हो सकती है, जो कंपनियों को देश के टियर -2 और टियर -3 शहरों में संचालन स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करती है।
प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण● हाल के वर्षों में विकृत भुगतान एक व्यापक समस्या बन गई है। प्राप्तकर्ता की सहमति या ज्ञान के बिना, बैंक भुगतानों को गलत खाते पर पुनर्निर्देशित किया जा रहा है।
● "l’affaire Airtel" - 2017 में प्रकाश में आने वाली इस घटना के तहत् एलपीजी सब्सिडी का एयरटेल वॉलेट्स में व्यापक मुड़ाव हुआ था। कई वॉलेट अनचाहे, या यहां तक कि प्राप्तकर्ताओं के लिए अज्ञात थे। इसके बाद सब्सिडी का पैसा लौटाया गया, और UIDAI द्वारा एयरटेल पर ज़ुर्माना लगाया गया।
कृषि ऋण माफ़ी● मेरे लिए ऋण का माफ़ किया जाना चिंता का विषय है क्योंकि यह केवल उन किसानों पर लक्षित है जिन्होंने व्यवस्था से ऋण लिया है, न कि उन ग़रीब किसानों से जो ऋणदाताओं या कृषि कार्यकर्ता से ऋण लेते हैं, क्यों कि उन्हें पहले कभी ऋण नहीं मिला था।
● इसलिए, मेरे विचार से एक बेहतर लक्षित प्रणाली होनी चाहिए। भारत को ऋण माफ़ी के बजाय कृषि संकट के समाधान पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है जो ऋण संस्कृति का ही पतन करते हैं। - राजन