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ईरान का परमाणु संवर्धन

Iran’s nuclear enrichment

उल्लेख: GS2 || अंतर्राष्ट्रीय संबंध || भारत और शेष विश्व || पश्चिम एशिया 

सुर्खियों में क्यों?

  • ईरान ने हाल ही में पुष्टि की है कि उसने 2015 के परमाणु समझौते के समृद्ध यूरेनियम के भंडार की सीमा को भंग कर दिया है, जो यह दर्शाता है कि कुछ ही महीनों के अंदर, तेहरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त हथियारग्रेड यूरेनियम उपलब्ध हो सकता है।

ईरान परमाणु समझौता क्या है?

  • अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन, फ्रांस और जर्मनी के साथ 2015 के समझौते में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने पर सहमति व्यक्त की है।
  • जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPoA) के तहत तेहरान ने सेंट्रीफ्यूज, समृद्ध यूरेनियम और भारी-पानी जैसे सभी प्रमुख घटकों के, परमाणु हथियारों के अपने भण्डारों में महत्वपूर्ण रूप से कटौती करने पर सहमति व्यक्त की।
  • जेसीपीओए ने समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए सभी बातचीत करने वाली प्रतिनिधि पार्टियों के साथ संयुक्त आयोग की स्थापना की है।
  • 2015 के सौदे ने ईरान के यूरेनियम के स्तर को67 प्रतिशत शुद्धता तक सीमित कर दिया है जिसेकमसमृद्ध यूरेनियमकहा जाता है और 300 किलोग्राम तक के परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों के ईंधन उत्पादन के लिए उपयुक्त है।

ईरान समझौते के लिए क्यों सहमत हुआ?

  • यह संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ के विनाशकारी आर्थिक प्रतिबंधों के तले दबा हुआ है, जिसमें उसने तेल निर्यात के अवसर खोने के कारण राजस्व में प्रति वर्ष दसियों अरबों पाउंड का नुकसान झेला है। विदेशों में अरबों की संपत्ति का संचालन भी रोक दिया गया है।

अमेरिका ने समझौते से क्यों हाथ खींच लिए हैं?

  • सौदे के लिए ट्रम्प और विरोधियों का कहना है कि यह त्रुटिपूर्ण है क्योंकि यह ईरान को अरबों डॉलर तक की पहुंच प्रदान करता है लेकिन हमास और हिजबुल्लाह जैसे समूहों को, जिन्हें US आतंकवादी मानता है, के ईरान के समर्थन को संबोधित नहीं करता है । उनका मानना है कि यह ईरान द्वारा विध्वंसकारी मिसाइलों के विकास पर अंकुश नहीं लगाता है और यह सौदा 2030 तक समाप्त भी हो जाएगा। उनका कहना है कि ईरान ने अतीत में अपने परमाणु कार्यक्रम के बारे में भी झूठ बोला था।