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क्या है? प्रवासी मजदूरों पर कोविड 19 का प्रभाव - भारत में मानव प्रवास संबंधी तथ्य

What is Migration? Impact of Covid 19 on Migrant Labours – Facts about Human Migration in India

प्रासंगिकता:

जीएस 1 || समाज || जनसंख्या || प्रवासन

विषय: प्रवासन क्या है? प्रवासी मजदूरों पर कोविड 19 का प्रभाव – भारत में मानव प्रवास संबंधी तथ्य

सुर्खियों में क्यों?

महामारी के तेजी से फैलने से दुनिया भर के देश प्रभावित हुए, जिसके कारण व्यापक लॉकडाउन लगाये गए, अन्तत: जिसने गतिशीलता, वाणिज्यिक गतिविधियों और सामाजिक संपर्कों को बुरी तरह बाधित किया। भारत में, महामारी ने ‘गतिशीलता का एक गंभीर संकट’ पैदा किया, जहां कई प्रमुख शहरों में प्रवासी मजदूर अपने गृहनगर में लौटने की कोशिश करते देखे गये।

पृष्ठभूमि:

  • महामारी के तेजी से फैलने से दुनिया भर के देश प्रभावित हुए, जिसके कारण व्यापक लॉकडाउन लगाये गए, अन्तत: जिसने गतिशीलता, वाणिज्यिक गतिविधियों और सामाजिक संपर्कों को बुरी तरह बाधित किया।
  • भारत में, महामारी ने आवागमन का एक गंभीर संकट’ पैदा किया, जहां कई प्रमुख शहरों में प्रवासी मजदूर अपने गृहनगर में लौटने की कोशिश करते देखे गये।
  • किसी भी तरह से घर लौटने की उनकी बेताब कोशिशों ने कई क्षेत्रों में लॉकडाउन को अप्रभावी बना दिया, जिसमें अधिकारियों या व्यवस्था के साथ टकराव देखे गये, अंतिम क्षण में नीति संबंधी राहत प्रदान की गयी और अंततः परिवहन उपायों की व्यवस्था उपलब्ध करायी गयी।
  • इस लेख का उद्देश्य उनकी गतिशीलता, लिंग और मानसिक स्वास्थ्य के संदर्भ में भारत के आंतरिक प्रवासियों की भेद्यता पर प्रकाश डालना है।

समझें प्रवास के सभी पहलुओं को:

प्रवास क्या है?

  • प्रवासन, एक व्यक्ति या समूह द्वारा निवास का स्थायी परिवर्तन; इस तरह के गतिशीलन को बंजारों के घुमक्कड़ अभ्यासों, प्रवासी श्रम, आने-जाने और पर्यटन के प्रारूपों से बाहर रखा गया है, क्योंकि ये सभी प्रकृति में क्षणभंगुर हैं।
  • प्रवासन को कई व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। सबसे पहले, आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय प्रवास में अंतर स्पष्ट किया जा सकता है।
  • किसी भी देश में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में व्यक्तियों और परिवारों का आवागमन होता है (उदाहरण के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर), और यह एक देश से दूसरे देश में होने वाले गतिशीलन से अलग है। दूसरा कि यह प्रवास स्वैच्छिक या जबरन हो सकता है।
  • अधिकांश स्वैच्छिक प्रवास, चाहे वह आंतरिक हो या बाहरी, बेहतर आर्थिक अवसरों या आवास की तलाश में किया जाता है।
  • जबरन पलायन में आमतौर पर वे लोग शामिल होते हैं जिन्हें युद्ध या अन्य राजनीतिक उथल-पुथल के दौरान सरकारों द्वारा निष्कासित कर दिया जाता है या जिन्हें दास या कैदियों के रूप में जबरन ले जाया जाता है।
  • इन दो श्रेणियों के बीच युद्ध, अकाल या प्राकृतिक आपदाओं से भागे शरणार्थियों का स्वैच्छिक पलायन मध्यवर्ती होता है।

प्रवास के प्रकार:

  • आंतरिक प्रवासन: आंतरिक प्रवासन एक व्यक्ति के निवास का एक नागरिक डिवीजन से दूसरे डिवीजन में या किसी नागरिक डिविजन की प्रशासनिक सीमा में कहीं भी किया जाने वाला स्थानांतरण है। इस प्रकार, यह कहा जा सकता है कि एक प्रवासी एक चालक है जो उसे (या उसके) निवास को उसके सामान्य निवास के राजनीतिक क्षेत्र से बदलता है।
  • आंतरिक प्रवास के तहत गतिशीलन की दिशा के आधार पर, ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में और उनके बीच गतिशीलन की दिशा के अनुसार चौतरफा वर्गीकरण किया गया है जो इस प्रकार है:
  • नीचे दिये गये चित्र ग्रामीण से शहरी गतिशीलन को दर्शाते हैं –

  • आंतरिक प्रवास विभिन्न प्रेरणाओं और कारणों के कारण होता है। ये मुख्य श्रेणियों में आते हैं:
  • विवाह संबंधी प्रवास
  • श्रम प्रवास; या काम, रोजगार आदि के लिए लोगों का प्रवास।
  • प्राकृतिक आपदाओं के कारण प्रवासन

अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन:

  • एक अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन तब होता है जब लोग अपने गृह देश की राजनीतिक सीमा को पार करते हैं और दूसरे में प्रवेश कर जाते हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रवास मानव इतिहास जितना पुराना है, फिर भले ही यह स्वैच्छिक रहा हो या अकाल, युद्ध और विविध प्रकार के उत्पीड़न से पीड़ित लोगों पर जबरन लागू किया गया हो। दुर्भाग्य से, सटीक जानकारी की कमी के कारण, ऐसे पलायनों का आकार और प्रकृति वास्तव में ज्ञात नहीं है।

कुछ अन्य प्रकार के प्रवासन:

  • जबरन पलायन: प्रवासी आंदोलन जिसमें ज़बरदस्ती का एक तत्व मौजूद होता है, में जीवन और आजीविका के लिए खतरा शामिल होता है, फिर भले ही यह प्राकृतिक या मानव निर्मित कारणों से उत्पन्न हो (जैसे शरणार्थियों और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों का गतिशीलन; इसके अलावा प्राकृतिक या पर्यावरणीय आपदाओं, रासायनिक परमाणु आपदा, अकाल, या विकास परियोजनाओं के परिणामस्वरूप विस्थापित हुए लोग) ”।
  • वृत्तीय प्रवासन: यह अस्थायी या दीर्घकालिक प्रवासन सहित देशों के बीच लोगों का द्रव गतिशीलन है, जो स्वेच्छा से घटित होने पर इसमें शामिल सभी के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालांकि यह उत्पत्ति और गंतव्य के देशों की श्रम आवश्यकताओं से जुड़ा होता है।
  • अनियमित / गैर-प्रलेखित प्रवासन: वह गतिशीलन जो भेजे जाने, पारगमन और प्राप्तकर्त्ता देशों के नियामक मानदंडों के बाहर होता है। अनियमित प्रवासन की कोई स्पष्ट या सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत परिभाषा नहीं है। गंतव्य देशों के दृष्टिकोण से, यह किसी भी देश में प्रवेश करने, रहने या काम करने से जुड़ा है जहां आव्रजन नियमों के तहत आवश्यक प्राधिकरण या दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रवासन का इतिहास:

  • इतिहास में सबसे बड़ा प्रवास यूरोप से उत्तरी अमेरिका में तथाकथित ग्रेट अटलांटिक प्रवासन था, जिसकी पहली प्रमुख लहर 1840 के दशक में आयरलैंड और जर्मनी से बड़े पैमाने पर आव्रजन के साथ शुरू हुई थी।
  • 1880 के दशक में पूर्वी और दक्षिणी यूरोप से दूसरी और बड़ी लहर विकसित हुई; 1880 और 1910 के बीच कुछ 17 मिलियन यूरोपीय लोगों ने संयुक्त राज्य में प्रवेश किया।
  • 1820 और 1980 के बीच संयुक्त राज्य तक पहुंचने वाले यूरोपीय लोगों की कुल संख्या 37 मिलियन थी।
  • 1801 से 1914 तक लगभग 7.5 मिलियन प्रवासी यूरोपीय से एशियाई रूस (यानी, साइबेरिया) चले गए, और विश्व युद्ध I और II के बीच लगभग 6 मिलियन अधिक लोग स्वैच्छिक रूप से वहां गये। इसमें सोवियत श्रम शिविरों में आये असंख्य निर्वासितों की गिनती शामिल नहीं है।
  • द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से हुए सबसे बड़े स्वैच्छिक प्रवासन में विकासशील देशों से औद्योगिक देशों में जाने वाले समूह शामिल हैं।
  • सबसे बड़े सामूहिक निष्कासन के लिए संभवतः नाजी जर्मनी जिम्मेदार है, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध (1939–45) के दौरान 7 से 8 मिलियन लोगों को निर्वासित किया था।
  • भारत और पाकिस्तान की सीमा में सबसे बड़ा प्रवास आजादी के समय देखा गया था।
  • संसद ने अंतरराज्यीय प्रवासी कामगार (विनियमन और सेवा की शर्तें) अधिनियम 1979 को विशेष रूप से पारित किया, जो राज्य की सीमाओं पर प्रवास करने वाले श्रमिकों की भर्ती और रोजगार से जुड़े कुप्रभावों से निपटने के लिए किया गया था। हालांकि राज्य सरकार द्वारा व्यवहार में इस अधिनियम की भारी अनदेखी की गयी है।

प्रवास के कारण:

  • प्रवासन के संदर्भ में, दोनों प्रतिकर्ष (push) और अपकर्ष (pull) दोनों ही कारक मौजूद हैं; प्रतिकर्ष कारक उन कारणों से संबंधित हैं जिनके कारण लोग अपने देश को छोड़ना चाहते हैं; और अपकर्ष कारक उन कारणों से संबंधित हैं जिनके कारण लोग नए देश में आना चाहते हैं। प्रवासन में, ये दोनों कारक आर्थिक, पर्यावरणीय, सामाजिक और राजनीतिक हो सकते हैं। उनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
  • सुरक्षा कारक: सुरक्षा कारक व्यक्तियों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं, उन्हें पलायन करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
  • किसी विशेष सामाजिक समूह में राष्ट्रीयता, जाति, धर्म, राजनीतिक मान्यताओं या सदस्यता की स्थिति के आधार पर किया जाने वाला उत्पीड़न और भेदभाव, लोगों को एक सुरक्षित स्थान की तलाश में बड़ी दूर स्थानांतरित होने के लिए प्रेरित करेगा जहां उन्हें अपने जीवन पर अधिक स्वतंत्रता होगी।
  • किसी औपचारिक कारण जैसे युद्ध या किसी अनौपचारिक कारण जैसे व्यापक गिरोह गतिविधियों के परिणामस्वरूप भी लोगों को खतरा हो सकता है।
  • आर्थिक कारक: आर्थिक प्रवास, चाहे स्थायी हो या मौसमी, प्रवास के लिए सामान्यतः उद्धृत किया गया कारण है।
  • सामान्य तौर पर, यह माना जाता है कि आर्थिक प्रवासन में लोग गरीब विकासशील क्षेत्रों से समृद्ध क्षेत्रों में चले जाते हैं जहां मजदूरी अधिक होती है और अधिक रोजगार उपलब्ध होते हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी शहरी क्षेत्रों में जाना और अधिक अवसर खोजना काफी सामान्य घटना है।
  • पर्यावरणीय कारक: पर्यावरणीय कारकों के कारण होने वाला प्रवासन प्रकृति में पूर्ण रूप सेअनैच्छिक है।
  • पर्यावरणीय कारक, सामाजिक या पर्यावरणीय कारकों द्वारा, विस्थापन या लोगों के जबरन पलायन का कारण बनते हैं।
  • उदाहरण के लिए खराब फसल, अक्सर भोजन की कमी और कृषि रोजगार, दोनों में गिरावट का कारण बनती है, जिससे लोग बेहतर रोजगार के अवसरों और बेहतर जलवायु वाले स्थानों पर स्थानांतरण के लिए प्रेरित होते हैं।
  • शहरी और ग्रामीण दोनों व्यवस्थाओं में पानी, हवा और मिट्टी का प्रदूषण भी स्थानीय लोगों के लिए एक गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है, जिसके कारण वे अपने और अपने बच्चों के लिए बेहतर जीवन की तलाश करते हैं।
  • सामाजिक कारक: प्रवासन को भड़काने वाले सामाजिक कारक, जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए मानवीय आवश्यकताओं और इच्छाओं से उत्पन्न होते हैं।
  • प्रवासी अक्सर अपने या अपने परिवार के लिए बेहतर अवसर सुनिश्चित करने के लिए आगे बढ़ते हैं, जैसे कि अपने बच्चे को एक बेहतर, सुरक्षित स्कूल में भेजना या ऐसी नौकरी खोजना, जिसमें न केवल पर्याप्त वेतन हो, बल्कि महत्वपूर्ण लाभ और करियर के लिए विकास संबंधी संभावनाएं भी हों।

प्रवासी श्रमिक की समस्याएँ:

  • समाज में मांग के अभाव में मजदूर के पास धन का अभाव होता है
  • अनियमित भुगतान से कर्मी पर कर्ज हो जाता है
  • अंतिम भुगतान में कटौती आम बात है
  • मजदूरों को कोई उचित आवास नहीं दिया जाता है
  • पोषणयुक्त भोजन के अभाव के परिणामस्वरूप उनमें छिपी भूख बनी रहती है
  • प्रवासी के बच्चों को उचित शिक्षा नहीं मिल पाती है और न ही प्रवासी महिला कर्मियों को स्वास्थ्य संबंधी सेवाएँ प्राप्त होती हैं, इससे कई समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं।
  • कई बार या आमतौर पर प्रवासी श्रमिक अपने मूल स्थान से प्रवास के कारण अपना कीमती वोट डालने में असमर्थ होते हैं
  • अपनी पहचान साबित करना, उन प्रमुख मुद्दों में से एक है, जिनका किसी नयी जगह जाने पर प्रवासी सबसे अधिक सामना करते हैं। यह एक ऐसी समस्या है जो प्रवासन के बाद, वर्षों या दशकों तक बनी रहती है। पहचान दस्तावेज जो राज्य द्वारा प्रमाणित होता है, यह सुनिश्चित करने के लिए अपरिहार्य होता है कि किसी व्यक्ति को एक सुरक्षित नागरिकता का दर्जा प्राप्त है और वह उन अधिकारों और सुरक्षा का लाभ उठा सकता है जिन्हें राज्य प्रदान करता है। पहचान स्थापित करने में असमर्थता के परिणामस्वरूप, एंटाइटेलमेंट और सामाजिक सेवाओं तक पहुंच का नुकसान होता है। पहचान की कमी का मतलब है कि प्रवासी सब्सिडी वाले भोजन, ईंधन, स्वास्थ्य सेवाओं या शिक्षा जैसे प्रावधानों का उपयोग करने में सक्षम नहीं हैं जो कि विशेष तौर पर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए ही बनाये गये हैं।

प्रवासी श्रमिक के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई पहल:

  • आत्मनिर्भर भारत के तहत बीस लाख करोड़ का वित्तीय पैकेज विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, MSME क्षेत्र को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने हेतु शुरू किया गया है। इसमें इन सभी क्षेत्रों के लिए कई पहल शामिल हैं।
  • अपने EPF खाते के माध्यम से श्रमिकों को न्यूनतम वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, प्रधान मंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सभी EPF सदस्यों को उनके EPF खाते में जमा कुल भविष्य निधि का 75% निकालने की अनुमति दी है। अब तक, EPFO ​​के सदस्यों द्वारा लगभग 39,000 / – करोड़ रुपये निकाले जा चुके हैं।
  • आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश रोज़गार अभियान: यह योजना स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा देने और 1.25 करोड़ प्रवासी श्रमिकों को रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए औद्योगिक संघों के साथ साझेदारी से संबंधित है, जिन्होंने कोविड -19 महामारी के दौरान अपनी नौकरी खो दी थी। राज्य सरकार ने पहले ही श्रमिकों के कौशल का मानचित्रण कर दिया है ताकि उन्हें उनकी विशेषज्ञता के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जा सके।
  • आत्मनिर्भर गुजरात सहाय योजना: यह योजना उन लोगों के लिए है जो 2 प्रतिशत वार्षिक ब्याज पर बैंकों से 1 लाख रुपये का गारंटी-मुक्त ऋण लेना चाहते हैं। इस योजना के साथ राज्य का उद्देश्य छोटे व्यापारियों, कुशल मजदूरों, श्रमिकों, इलेक्ट्रीशन, ऑटो-रिक्शा मालिकों और अन्य लोगों की मदद करना है जिनकी आजीविका COVID 19 से प्रभावित हुई है।

निष्कर्ष:

प्रवासन से तात्पर्य, एक देश में एक प्रशासनिक / राजनीतिक क्षेत्राधिकार से दूसरे देश में जाने वाले लोगों की घटना से है। प्रवासन मानव सभ्यता जितना ही पुराना है जिसका पूरे इतिहास में सामाजिक परिवर्तनों में एक बड़ा योगदान रहा है। इस कारण से, आवश्यक है कि हम प्रवासन की प्रक्रिया और उन कारकों को समझें जो लोगों को प्रवास करने के लिए प्रेरित (या मजबूर) करते हैं। इस प्रकार, आंतरिक और अंतर्राष्ट्रीय प्रवास को विभिन्न मानदंडों के आधार पर कई श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न:

कोविड -19 महामारी ने गरीब प्रवासी श्रमिक के प्रवास को प्रेरित किया है। किसी भी महामारी के समय भविष्य में इस तरह के गतिशीलन को रोकने के लिए सरकार द्वारा क्या किया जा सकता है? (200 शब्द)