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अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक, 2019

Banning of Unregulated Deposit Schemes Bill, 2019

उल्लेख: GS3 || अर्थव्यवस्था || बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र || मुद्रा बाजार

खबरों में क्यों?

  • राज्यसभा ने अनियमित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध लगाने संबंधी विधेयक,2019 पारित किया

यह विधेयक इन तीन कानूनों में संशोधन चाहता है: –

  • भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934
  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अधिनियम, 1992
  • बहु राज्य सहकारी समितियां 2002

विधेयक का उद्देश्य :

  • पोंजी योजनाओं को प्राइज चिट एण्ड मनी सर्कुलेशन (प्रतिबंध) अधिनियम, 1978 के तहत प्रतिबंधित किया गया है। हालांकि यह एक केंद्रीय अधिनियम है लेकिन संबंधित राज्य सरकार इस कानून की प्रवर्तन एजेंसी है। वर्ष 2016 में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि प्रतिबंधित पोंजी स्कीम उसके नियमन के दायरे में नहीं आती।
  • एक अधिकारी ने बयान देते हुए कहा कि, यह विधेयक देश में अवैध रूप से जमा लेने वाली गतिविधियों के खतरे से जल्द-से-जल्द निपटेगा। ये गतिविधियां लोभी ऑपरेटरों द्वारा शुरू कि गई थीं, जो वर्तमान में नियामकीय खामियों तथा सख्त प्रशासनिक उपायों के अभाव का फायदा उठाते हैं ताकि गरीब और भोले-भाले लोगो की मेहनत की कमाई को ठग सकें
  • विधेयक पूरी तरह से अनियमित जमा योजनाओं के लेन-देन पर प्रतिबंध लगाएगा, और कानून में ऐसे मामलों में सजा और जुर्माना या जमा राशि के पुनर्भुगतान के लिए पर्याप्त प्रावधान भी हैं, जिनके तहत ऐसी योजनाएं अवैध तौर पर जमा राशि जुटाने में सफल हो जाती हैं।

 पोंजी योजनाओं का इतिहास:

  • पोंजी योजनाओं का नाम चार्ल्स पोंजी के नाम पर रखा गया है, जो एक इटालियन-अमेरिकी थे, जिन्होंने 1919 में बोस्टन, अमेरिका में एक निवेश योजना शुरू की थी, जिसमें उन्होंने पहले 90 दिनों में और बाद मे 45 दिनों में निवेशकों के धन को दोगुना करने का वादा किया था।
  • पोंजी के पास इतने कम समय में धन दोगुना करने का कोई व्यवसाय मॉडल नहीं था। उन्होंने बस पुराने निवेशकों को भुगतान करने हेतु नए निवेशकों से लिए धन का उपयोग किया था।
  • यह योजना तब तक चली जब तक पुराने निवेशकों को दिए जाने वाला धन नए निवेशकों से नए निवेशकों से लिए धन से अधिक न हो गया।
  • जैसे ही यह समीकरण उलट गया, तो यह योजना विफल हो गई।

प्रमुख पोंजी घोटाले:

  • 49,000 करोड़ के पर्ल चिटफंड घोटाले ने 5.5 करोड़ जमाकर्ताओं को प्रभावित किया।
  • ऑस्कर चिटफंड में 1.2 लाख लोगों का धन जमा था।
  • रोज वैली चिटफंड घोटाला
  • शारदा चिटफंड घोटाला

  • स्टॉक गुरु घोटाला
  • स्पीक एशिया घोटाला

विधेयक के प्रमुख प्रावधान:

  • विधेयक में विधिवत प्रस्तावित प्रतिबंध खण्ड है जो जमाकर्ताओं को किसी भी अनियमित जमा योजना का प्रचार-प्रसार करने, संचालन करने, विज्ञापन जारी करने अथवा जमा राशी जुटाने से प्रतिबंधित करता है। विधेयक अनियमित जमा जुटाने से जुड़ी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगाएगा। इसके तहत इस तरह की गतिविधियों को प्रत्याशित अपराध माना जाएगा, जबकि मौजूदा विधायी-सह-नियामकीय तंत्र केवल व्यापक समय अंतराल के बाद ही यथार्थ या अप्रत्याशित रूप से प्रभावी होता है।
  • विधेयक में अपराधों के तीन प्रकार निर्दिष्ट किये गये हैं, जिनमें अनियमित जमा योजनाएं चलाना, नियमित जमा योजनाओं में धोखाधड़ी के उद्देश्‍य से डिफॉल्‍ट करना और अनियमित जमा योजनाओं के संबंध में गलत इरादे से प्रलोभन देना शामिल हैं।
  • विधेयक में कठोर दंड देने और भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया गया है, ताकि लोग इस तरह की गतिविधियों से दूर रह सकें।
  • विधेयक में उन मामलों में जमा राशि को वापस लौटाने या पुनर्भुगतान करने के पर्याप्त प्रावधान किये गये हैं, जिनके तहत ऐसी योजनाएं किसी भी तरह से अवैध तौर पर जमा राशि जुटाने में सफल हो जाती हैं।
  • विधेयक में सक्षम प्राधिकरण द्वारा संपत्तियों/ परिसम्पतियों को जब्‍त करने और जमाकर्ताओं को पुनर्भुगतान करने के उद्देश्‍य से इन परिसम्‍पत्तियों को हासिल करने का प्रावधान किया भी किया गया है।
  • सम्पत्ति को जब्‍त करने और जमा कर्ताओं को धन राशि वापस करने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की गई है।
  • विधेयक में एक ऑनलाइन केंद्रीय आंकड़ा संचय बनाने का प्रावधान किया गया है, ताकि देश भर में जमा राशि जुटाने की गतिविधियों से जुड़ी सूचनाओं का संग्रह करने के साथ-साथ उन्‍हें साझा भी किया जा सके।

विधेयक जमा राशि जुटाने वालेऔर जमा राशिको व्यापक रूप से परिभाषित करता है।

  • “जमा राशि जुटाने वालोंमें ऐसे सभी संभावित निकाय (लोगों सहित) शामिल हैं, जो जमा राशियां जुटाते हैं या प्राप्त करते हैं। इनमें ऐसे विशिष्‍ट निकाय शामिल नहीं हैं, जिनका गठन विधान के जरिए किया गया है।
  • “जमा राशि”को कुछ इस तरह से परिभाषित किया गया है कि जमा राशि जुटाने वालों को लोगों की धनराशि को प्राप्तियों के रूप में छलावरण करने से प्रतिबंधित किया जा सके और इसके साथ ही किसी प्रतिष्ठान द्वारा अपने व्यवसाय के तहत सामान्‍य ढंग से धनराशि स्‍वीकार करने पर कोई अंकुश न लगे और न इसे बाधित करे।

आगे का रास्ता :

  • यह कानून किसी घोटालेबाज के पकड़े जाने के बाद न्याय की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करता है। लेकिन इन योजनाओं को प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त किया जाना अधिक महत्वपूर्ण। इसके लिए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड(SEBI) और भारतीय रिजर्व बैंक(RBI) के अधिकारियों को अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्हें लोकप्रिय और फैलते पोंजी योजनाओं के बारे में पहले से ही पता होना चाहिए।