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आधार को मतदाता पहचान पत्र से जोड़ने के लाभ

Benefits of linking Aadhaar with voter ID

उल्लेख: GS2 || राजसत्ता || राजनीतिक गतिशीलता || चुनाव

चर्चा में क्यों हैं?

  • 2019 के आम चुनावों में मतदाता पात्रता और उनकी भूमिकाओं में गड़बड़ियां देखी गईं और कईयों के मतदान अधिकार भी छीन लिए गये।
  • आधार को वोटिंग आईडी से जोड़कर मतदाताओं की से इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है, जिनके बारे में नीचे विस्तार से चर्चा की गई है।
  • आधार कार्ड को वोटर आईडी से लिंक करने में इतनी हिचकिचाहट क्यों?

मुद्दा- कई लोग वोट करने के लिए रजिस्टर करने में असमर्थ हैं।

  • रजिस्ट्रेशन के बारे में जानकारी नहीं होने से लेकर इसकी प्रक्रिया में वोटर खुद को असुविधाजनक महसूस करता है।
  • चुनौतियां- यह भारत के चुनाव आयोग (ECI) की जिम्मेदारी बनती है कि वह योग्य मतदाताओं को सूचित करे, जिन्होंने अभी तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है।
  • चुनाव आयोग इन चुनौतियों से निपटने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाती है, लेकिन फिर भी अपंजीकृत व्यस्क नागिरकों की पहचान करना इतना आसान नहीं है।
  • वर्तमान में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के लिए नए सिरे से आवेदन करने का सबसे आसान तरीका एनवीएसपी (राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल) या ईसीआई के ऐप पर एक फॉर्म 6 भरना होता है।
  • हालांकि, यह एक बहुत ही बोझिल अभ्यास है और संभावित रूप से बड़े स्तर पर वोटर रजिस्ट्रेशन का प्रयास किसी बाधा से कम नहीं है।
  • इस समस्या से कैसे निकला जाए- आधार कार्ड से इस प्रक्रिया को काफी हद तक सरल बनाया जा सकता है। आधार कार्ड से चुनाव आयोग यह पता लगा सकता है कि कौनसा निवासी वोट देने के लिए योग्य है।
  • इस पूरी प्रक्रिया को ई-केवाईसी आधार के द्वारा बदला जा सकता है।

मतदाता सूची में क्या गलत हुआ?

प्रक्रिया- कई सरकारी अधिकारियों के पास विवेकाधीन शक्तियाँ होती हैं जो उन्हें मतदाता सूचियों से नाम हटाने के लिए सशक्त बनाती हैं।

  • इसके अलावा चुनाव आयोग को संविधान के अनुसार कुछ शर्तों के तहत नागरिकों को मतदान से अयोग्य घोषित करने का अधिकार है।
  • चुनाव आयोग का यह दायित्व बनता है कि वे मतदान से अयोग्य लोगों की सूची को उनके राज्य के अनुसार प्रकाशित करें।
  • हालांकि, उनकी अयोग्यता के कारणों में शामिल नहीं किया जाता है और संभवतः रिकॉर्ड भी नहीं किया जाता है।

चिंताएं- ऐसे कई लोग हैं जिन्होंने पहले किसी विशेष बूथ पर मतदान किया है, लेकिन बाद में मतदाता सूची से उन्हें बाहर कर दिया गया।

  • कई मामलों में चुनाव आयोग के पास मतदाताओं के कॉन्टेक्ट इनफॉर्मेशन (या अपडेट किए गए) नहीं होते हैं, ताकि उन्हें हटाने से पहले सूचित किया जा सके।
  • अब तक कॉन्टेक्ट इनफॉर्मेशन नहीं होने की वजह से चुनाव आयोग यह डिटेल एकत्रित नहीं कर पाता था।
  • इसके अलावा, सबसे ज्यादा हैरान करने वाली वजह पार्टियों (और राजनेताओं) और मतदाताओं में एक जैसा राजनीतिक उत्साह है।
  • ऐसे हैरान करने वाले कई मामले सामने आए हैं, जहां एक मतदाता कई बूथों पर मतदान करने के लिए पंजीकृत हैं और ऐेसे में वे कई बार मतदान भी करते रहे हैं।
  • इस समस्या से कैसे निपटें- रजिस्ट्रेशन के दौरान आधार होल्डर चुनाव आयोग को अपना कॉन्टेक्ट डिटेल साझा करने के लिए सहमति दे सकते हैं।
  • मतदाता सूची के संबंध में निजी और राजनीतिक हस्तियों की अवैधता की जाँच की जानी चाहिए।
  • यहां आधार की धोखाधड़ी और आधार डुप्लिकेट से निपटने के लिए किसी फिचर को रखा जा सकता है।

आगे का रास्ता क्या हो सकता है?

  • जैसे कि अब तक चर्चा की गई है कि कई खामियां आधार के साथ हटाए जा सकते हैं।
  • यह ईपीआईसी (Electors Photo Identity Card) के समान विवरण के माध्यम से देश के प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट पहचान करता है।
  • वहीं, ईपीआईसी की ही तरह आधार भी बायोमेट्रिक डेटा को कैप्चर करता है, जो विशिष्टता को मान्य करने में उपयोगी है।
  • हालांकि, दिक्कत यह है यदि कोई नाम वोटिंग लिस्ट में नहीं आता है, तो उसे वोटिंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी क्योंकि ईपीआईसी वोट की गारंटी नहीं देता है।
  • यहां तक ​​कि अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में दिखाई देता है, तो भी ईपीआईसी एकमात्र दस्तावेज नहीं है जिसे पहचान के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाए।
  • इसलिए जरूरी है कि आज के दौर में EPIC के बारे में फिर से विचार किया जाए।
  • इस संबंध में चुनाव आयोग ने सार्वजनिक रूप से आधार के साथ अपने डेटाबेस को जोड़ने के लिए दिलचस्पी दिखाई है।
  • इसने स्वेच्छा से आधार को वोटर आईडी से जोड़ने का प्रयास किया, लेकिन 2017 में सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगा दी।
  • हालांकि, हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि चुनाव आयोग इन गतिविधियों को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रहा है।
  • यहां एक ध्यान देने वाली बात यह है कि आधार आज भारत में एकमात्र सार्वभौमिक, वास्तविक पहचान वाला बुनियादी संरचना है, तो जरूरी है कि इस कदम को और आगे ले जाया जाए।