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RBI पैसा छाप रहा है - रुपया दो सप्ताह के अंदर ही एशिया में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बना

RBI Printing Money – Rupee becomes Asia’s worst performing currency in 2 weeks

प्रासंगिकता:

जीएस 3 || अर्थव्यवस्था || बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र || पैसा

सुर्खियों में क्यों?

केवल दो सप्ताह में ही रुपया, एशिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली मुद्रा से हटकर बना सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा।

वर्तमान प्रसंग:

  • पिछली तिमाही में भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा में परिवर्तित हो गया है।
  • यह कोरोनावायरस मामलों में वृद्धि के रूप में अधिक नुकसान के लिए तैयार है, जिससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचने का खतरा है।
  • इस हफ्ते आठ महीने में रुपया पहली बार प्रति डॉलर के खिलाफ 75 तक कमजोर हुआ।

रुपये में गिरावट:

  • 38 USD के स्तर पर व्यापार करने से लेकर, रुपया 75.42 के स्तर तक फिसल गया, यानी तीन सप्ताह में 4.2% की गिरावट देखी गई।
  • रुपया एक डॉलर के खिलाफ 43 पैसे गिर गया, जो पिछले नौ महीनों में निचले स्तर पर पहुंच गया। डेटा दिखाता है कि पिछले तीन हफ्तों में रुपया सबसे बड़े नुकसान में से एक रहा है क्योंकि कोविड के बढ़ते मामलों और देश भर में आर्थिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव पर चिंता बढ़ रही है।

अन्य देशों के साथ तुलना:

  • रुपया पिछले 3 हफ्तों में सबसे कमजोर उभरती बाजार मुद्राओं में से एक रहा है क्योंकि डॉलर के मुकाबले 22 मार्च के बाद इसमें 2% की गिरावट देखी गयी है।
  • इसी अवधि में, केवल तुर्की न्यू लीरा में रुपये से अधिक गिरावट देखी गयी क्योंकि यह डॉलर के मुकाबले 4.36% गिरा।
  • जबकि उसी अवधि में ब्राज़ीलियन रियल ने 3.99% का नुकसान देखा, रूसी रूबल 3.25% तक कमजोर हो गया है।
  • थाई बाहत और इंडोनेशियाई रुपिया को डॉलर के मुकाबले इसी अवधि में 33% और 1.5% की हानि हुई है।

भारत के इस प्रदर्शन के प्रमुख कारण?

  • बढ़ती कोविद संख्या – 2 लाख से अधिक नये दैनिक मामले – एक प्रमुख चिंता के रूप में सामने आए हैं।
  • जैसा कि कई राज्य अब अधिक कठोर लॉकडाउन उपायों पर विचार कर रहे हैं, बाजार सहभागी अर्थव्यवस्था की रिकवरी में देरी से अधिक चिंतित हैं, जो 2020-21 में महामारी से बहुत अधिक प्रभावित हुई थी।
  • रुपये की गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक कारकों के कारण है:
  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका-चीन व्यापार युद्ध का निचले उद्योगों पर प्रभाव पड़ेगा जिसका अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर दृष्टव्य प्रभाव देखा जा सकेगा।
  • अमेरिकी डॉलर को मजबूत करना विदेशी निवेशकों को संयुक्त राज्य अमेरिका में आकर्षित करता है, जिससे भारत से FPI का बहिर्वाह होता है। डॉलर के कम प्रवाह से विनिमय दर प्रभावित होगी।
  • FPI के बहिर्वाह के कारण तुर्की की लीरा, अर्जेंटीना पेसो, दक्षिण अफ्रीका की रैंड जैसी अन्य नाजुक अर्थव्यवस्थाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
  • रुपये के घटते मूल्य का प्रभाव:
  • चूंकि भारत आयात के माध्यम से 80% ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करता है, इसलिए कमजोर रुपया, चालू खाता घाटा (CAD) को 3% तक बढ़ा देगा।
  • ईंधन जैसे आवश्यक आयात की कीमतों में वृद्धि परिवहन क्षेत्र को प्रभावित करेगी जो अपरिहार्य खाद्य आपूर्ति है, अंत में उपभोक्ताओं को मुद्रास्फीति की कीमतों के प्रकोप का सामना करना पड़ता है।
  • बाहरी ऋण वाली घरेलू कंपनियों को अब उच्च शुल्क देना होगा।
  • इसे रोकने के उपाय:
  • RBI कुछ विदेशी मुद्रा भंडार को जारी कर बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है।
  • RBI ब्याज दरों में बढ़ोतरी करके महंगाई को बनाए रख सकता है,
  • हाल के सरकारी उपाय – रुपये मूल्यवर्ग के बांड को बढ़ावा देना; फ्लोटिंग या अस्थाई NRI बॉन्ड द्वारा NRI निवेशकों की क्षमता का दोहन करना; आसान FPI मानदंड। ये उपाय रुपये के अवमूल्यन के रुझान से अल्पकालिक राहत प्रदान कर सकते हैं।

अमेरिका में बेहतर विकास:

  • इसके अलावा, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बेहतर वृद्धि की उम्मीदों के अनुरूप डॉलर के मजबूत होने से भी रुपये पर दबाव पड़ा है।
  • जबकि जनवरी 2021 की शुरुआत में डॉलर एक यूरो के लिए 1.233 पर कारोबार कर रहा था, यह वर्तमान में एक यूरो के लिए 1.189 पर कारोबार कर रहा है और5% से अधिक बढ़ा है। 1 मार्च 2021 से, डॉलर यूरो के मुकाबले 1.5% के करीब पहुंच गया है।

रुपया मुद्रण के बार में:

  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में धन मुद्रण के लिए एक नया शब्द गढ़ा है, और इसे सरकारी प्रतिभूति अधिग्रहण कार्यक्रम या G-SAP कह रही है।
  • मूल्य खोने वाले रुपये के लिए एक सरल स्पष्टीकरण इस तथ्य में निहित है कि आरबीआई की योजना पैसा छापने की है।
  • RBI 15 अप्रैल को 25,000 करोड़ रुपये की सरकारी प्रतिभूतियों की खरीद का पहला दौर आयोजित करेगा।
  • इन प्रतिभूतियों को खरीदने के लिए रुपया मुद्रित करना होगा।
  • इसका मतलब है कि प्रणाली में पहले की तुलना में अधिक रुपये होंगे, और इसलिए, डॉलर के मुकाबले रुपये का मूल्य कम हो रहा है।
  • हाल ही में आए G-SAP की घोषणा से पहले भी RBI पैसों का मुद्रण कर बांड खरीदता रहा है।
  • G-SAP घोषणा उसके लिए एक औपचारिकता थी जो RBI पहले से ही तदर्थ खुले बाजार संचालन के माध्यम से करता रहा है।
  • जनवरी से मार्च तक, नेट-नेट, RBI ने पैसे मुद्रित किये और 79,700 करोड़ रुपये के बांड खरीदे।

जनवरी से मार्च तक रुपये का मूल्य क्यों नहीं घटा, जैसा कि अप्रैल में देखा गया है?

  • उत्तर इस तथ्य में निहित है कि RBI ने अपने हालिया बयानों में यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सरकार के लिए बल्लेबाजी कर रहा है और सरकारी प्रतिभूतियों पर रिटर्न को कम रखने के लिए जो भी करना होगा, वह करेगा।
  • ताकि सरकारी प्रतिभूतियों पर रिटर्न कम रखा जा सके इससे सरकार कम लागत पर उधार ले सकेगी,
  • RBI को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रणाली में पर्याप्त रूप से रुपये खर्च हो रहे हैं। और इसके लिए उसे पैसे का मुद्रण जारी रखना होगा।

US बॉन्ड रिटर्न:

  • दूसरी ओर, अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर रिटर्न फरवरी की शुरुआत से बढ़ रहे हैं।
  • अगर यह जारी रहता है, तो इसका मतलब है कि पैसा भारत छोड़ कर अमेरिका जाएगा।
  • इसका मतलब डॉलर की बढ़ी हुई मांग होगी।
  • विदेशी मुद्रा बाजार इस संभावना के लिए समायोजन कर रहा है और रुपये के मूल्य को नीचे चला रहा है।

समाधान:

  • मेक इन इंडिया, हरित क्रांति आदि जैसे ‘घरेलू उत्पादन’ के लिए प्रोत्साहन (कम आयात पर निर्भर)
  • “मुद्रा अवमूल्यन प्रमाण” पहल जैसे उन्नत मूल्य निर्धारण समझौते आदि।
  • क्षेत्रीय समूहों में घरेलू / आम मुद्रा को बढ़ावा देना। उदाहरण के लिए: यूरोपीय संघ में यूरो।
  • अप्रत्याशित घटनाओं का सामना करने के लिए वित्तीय संसाधनों के एक पूल की स्थापना। उदाहरण के लिए: आईएमएफ फंड, BRICS में ‘आकस्मिक रिजर्व फंड’
  • FII निवेश के मानदंडों में ढील ताकि अधिक विदेशी निवेश आ सके।
  • मौद्रिक नीति समिति की तरह प्राधिकरणों का गठन करना ताकि मुद्रास्फीति और / या मुद्रा के मूल्यह्रास के खिलाफ उपाय किये जा सकें।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में घरेलू मुद्रा को मजबूत करना और सार्वभौमिक बनाने जैसे उपाय।
  • निर्यात को बढ़ावा
  • विदेशी मुद्रा में घरेलू मुद्रा बांड
  • अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाना

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न:

रुपये के मूल्यह्रास से भारतीय अर्थव्यवस्था में कई निहित मुद्दों पर बात होगी। समस्या के मूल कारणों की जाँच करें और समस्या के लिए समाधान का प्रस्ताव करें?