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International Relations

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भारत पाकिस्तान कश्मीर विवाद - क्या भारत ने कश्मीर पर किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार कर ली है? विदेश मंत्रालय की यूएई यात्रा

India Pakistan Kashmir Dispute – Has India accepted 3rd Party Mediation on Kashmir? MEA visit to UAE

प्रासंगिकता: जीएस 2 || अंतरराष्ट्रीय संबंध || भारत और उसके पड़ोसी देश || पाकिस्तान

सुर्खियों में क्यों?

संयुक्त अरब अमीरात की विदेश मंत्री ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री के साथ मुलाकात की। यह मीटिंग उन अटकलों के बीच देखने को मिली है जब यह कहा जा रहा है कि खाड़ी देश भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के लिए मध्यस्थता की पहल कर रहा है।

भारत-पाकिस्तान कश्मीर विवाद: पृष्ठभूमि

  • कश्मीर एक प्राकृतिक रूप से विविध हिमालयी राज्य है जो अपनी झीलों, घास के मैदानों और बर्फ से ढके पहाड़ों की सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है।
  • भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम द्वारा प्रदान की गई विभाजन योजना के तहत कश्मीर भारत या पाकिस्तान से आजाद प्रांत था।
  • कश्मीर के महाराजा- हरि सिंह शुरू में चाहते थे कि कश्मीर स्वतंत्र रहे – लेकिन अक्टूबर 1947 में पाकिस्तान से आदिवासियों के आक्रमण के खिलाफ मदद के बदले में उन्होंने भारत में शामिल होना चुना।
  • जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध छिड़ा, तो भारत ने संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप करने के लिए कहा।
  • संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने के सवाल को हल करने के लिए जनमत संग्रह कराने की सिफारिश की।
  • हालांकि, दोनों देश जनमत संग्रह के लिए अपनी सहमति व्यक्त नहीं की।
  • जुलाई 1949 में भारत और पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा अनुशंसित संघर्ष विराम रेखा को स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए और यह क्षेत्र विभाजित हो गया।
  • 1965 में एक दूसरा युद्ध हुआ। फिर 1999 में भारत ने पाकिस्तानी समर्थित ताकतों के साथ खुनी संघर्ष लड़ा।
  • आज, भारत और पाकिस्तान दोनों पूर्ण रूप से कश्मीर पर दावा करते हैं, लेकिन इसके कुछ हिस्सों दोनों देशों के नियंत्रण में हैं – अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर “भारतीय प्रशासित कश्मीर” और “पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर” के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।

कश्मीर का महत्व:

दोनों राष्ट्रों के बीच इस संघर्ष का मुख्य कारण राष्ट्रीय सुरक्षा, भूगोल और संसाधनों के मामले में कश्मीर का अत्यधिक मूल्यवान होना है।

  • जल संसाधन: इस क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में जल संसाधन हैं। सिंधु नदी की कम से कम तीन महत्वपूर्ण सहायक नदियां राज्य से होकर बहती हैं।
  • सिंधु नदी पाकिस्तान में कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विशेष रूप से निचले सिंधु घाटी क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, जहां वर्षा असामान्य है। इसी तरह, भारत सिंचाई के लिए सिंधु पर निर्भर है।
  • भू राजनीतिक महत्व: कश्मीर दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के बीच एक सेतु का काम करता है।
  • भारत के लिए, यह मध्य एशिया और यूरोप के लिए मध्य एशिया के माध्यम से एकमात्र सीधा मार्ग है।
  • पाकिस्तान और चीन के लिए यह बेल्ट एंड रोड पहल में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के लिए महत्वपूर्ण है।
  • भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: कश्मीर तीन परमाणु राष्ट्रों- भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच एक केंद्रीय टुकड़ा है।
  • इस समय, कश्मीर के मूल क्षेत्र में भारत का कुल क्षेत्रफल का लगभग 55% भाग पर नियंत्रण है, पाकिस्तान 30% भूमि पर नियंत्रण करता है और चीन इसका 15% नियंत्रण करता है।
  • यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। सियाचिन ग्लेशियर पाकिस्तान और चीन के बीच एकमात्र बाधा है।
  • संघर्ष के सामने, कश्मीर के बिना, चीन और पाकिस्तान भारत को गंभीर रूप से संकट में डाल सकते हैं। चीन और पाकिस्तान दोनों के साथ भारत के रणनीति संबंधों के साथ यह कश्मीर एक चिंताजनक स्थिति बना हुआ है।

कश्मीरियों के दृष्टिकोण से कश्मीर:

  • कश्मीरी परिप्रेक्ष्य वह है जिसे सबसे ज्यादा अनदेखा किया गया है।
  • कश्मीर के संघर्ष का एक तथ्य यह भी है कि कइयों का मानना है कि महराजा हरि सिंह द्वारा कश्मीर का भारत में विलय करना गैरकानूनी था। उनका मानना था कि हरि सिंह उस प्रांत के मेजोरिटी का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
  • भारत और पाकिस्तान के विभाजन के बाद, कश्मीर ने दोनों देशों के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और अपने भाग्य का फैसला किया।
  • हालांकि, भारत पर हमला करने वाले पाकिस्तानी आदिवासियों के साथ, अब्दुल्ला, महाराजा के प्रतिनिधि के रूप में, भारत आए और मदद मांगी, जिसके चलते कश्मीर भारत को सौंप दिया गया।
  • आक्रमण से पहले, कश्मीर की स्थिति अस्पष्ट थी। ऐसे कई लोग थे जो कश्मीर की आजादी की मांग कर रहे थे। हालांकि, ऐसे लोग भी थे जो भारत या पाकिस्तान जाने की इच्छा रखते थे।
  • बाद में, 1953 में अब्दुल्ला को एक स्वतंत्र कश्मीर बनाने की कोशिश करने और विदेशी शक्तियों के साथ गुप्त बैठक करने के लिए गिरफ्तार किया गया था।
  • 1954 में कश्मीरी संविधान सभा ने कश्मीर के भारत में प्रवेश की पुष्टि की।
  • 1980 में कश्मीर का तेजी से इस्लामीकरण हुआ। शहरों के नाम बदल दिए गए और प्रचार प्रसार किया गया।
  • अन्य धर्मों के लोगों को ‘जासूस’ या ‘बाहरी लोगो’ के रूप में कहा गया। उस दौरान कई ऐसे सबूत मिले, जिसमें यह देखा गया कि कश्मीर में सऊदी जैसे बाहरी ताकतों का हाथ शामिल था, जिसने इस्लामिकरण को बढ़ावा देने का काम किया। इसी दौरान पूरे प्रांत में हिंसा की शुरुआत हुई।
  • हिंसा की जो बड़े पैमाने पर भयवाह स्थिति देखी गई वह थी कश्मीरी हिंदुओं का पलायन।
  • इस दौरान हजारों कश्मीरी हिंदू मारे गए और मुस्लिम भीड़ द्वारा उन्हें भागने के लिए मजबूर किया गया और हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया।
  • तब से इस क्षेत्र में हिंसा और रक्तपात केवल जारी है। दशकों से इस क्षेत्र में विद्रोही समूहों, आतंकवादी संगठनों, पाकिस्तानी बलों और भारतीय बलों के बीच लगातार संघर्ष को देखा गया है। जिससे हजारों लोग मारे गए।
  • इसके परिणामस्वरूप, इस क्षेत्र में सैन्य कर्मियों और उपकरणों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

वर्तमान घटनाक्रम:

  • 2019 से पहले भारतीय प्रशासित कश्मीर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत देश के भीतर एक विशेष स्थान रखता है।
  • इसमें अपने स्वयं के संविधान, एक अलग ध्वज, और विदेशी मामलों, रक्षा और संचार को छोड़कर सभी मामलों पर स्वतंत्रता सहित राज्य के लिए महत्वपूर्ण स्वायत्तता शामिल थी।
  • हालांकि, अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से भारत की संसद द्वारा इसे खत्म कर दिया है।
  • भारत ने जम्मू और कश्मीर राज्य को विधायिका के साथ एक केंद्र शासित प्रदेश (UT) बना दिया।

पाकिस्तान की प्रतिक्रिया:

  • पाकिस्तान ने भारत के इस कदम प जमकर निंदा की और इसे “अवैध” करार देते हुए इसके खिलाफ सभी संभावित विकल्पों का इस्तेमाल करने वादा किया।
  • इसके बाद भारत के साथ राजनयिक संबंधों को भी कम कर दिया और सभी व्यापार को निलंबित कर दिया। भारत ने यह कहते हुए जवाब दिया कि उन्हें पाकिस्तान के बयान पर “पछतावा” है और दोहराया कि
  • अनुच्छेद 370 एक आंतरिक मामला था क्योंकि यह क्षेत्र की सीमाओं के साथ हस्तक्षेप नहीं करता था।
  • इससे पहले भारत और पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर 2003 में संघर्ष विराम पर सहमति जताई थी
  • पाकिस्तान ने क्षेत्र में विद्रोहियों को धन देने से रोकने का भी वादा किया, जबकि भारत ने उन्हें उग्रवाद का त्याग करने पर माफी की पेशकश की।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया:

  • जम्मू-कश्मीर की यथास्थिति को बदलने के लिए भारत के कदम की अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया काफी हद तक भारत के अनुकूल थी।
  • कई देशों ने अपना समर्थन व्यक्त किया और कहा कि भारत ने सिर्फ अपने आंतरिक मामलों से निपटने की कोशिश की है।
  • तुर्की और इंडोनेशिया जैसे कुछ मुस्लिम देशों ने हालांकि इस कदम पर चिंता व्यक्त की थी।

आगे का रास्ता:

  • अभी भी भारत और पाकिस्तान दोनों ही दृढ़ता से कश्मीर पर अपना दावा ठोकते हैं। कश्मीर भी दोनों देशों के लिए अविश्वसनीय रूप से मूल्यवान है।
  • यह कल्पना करना कठिन है कि या तो देश स्वेच्छा से कश्मीर का आत्मसमर्पण करेगा। यह तय है कि हजारों कश्मीरियों और सैनिकों ने अत्याचारों का सामना किया है और आज भी जारी है। इस क्षेत्र में मानवाधिकारों के उल्लंघन की भी खबरें आम है।
  • देर से ही सही, लेकिन भारत को अब अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त हुआ हैं। एक अर्थव्यवस्था के रूप में और सैन्य शक्ति के रूप में तेजी से बढ़ रहा है, भारत कई लोगों के लिए एक वांछनीय सहयोगी और व्यापार भागीदार बन गया है।
  • दूसरी ओर पाकिस्तान अब जांच के दायरे में है, जो इन दिनों आतंकवादी गतिविधियों और आतंकवादी संगठनों को धन देने के अपने समर्थन को वापस लेने के दबाव को झेल रहा है। पाकिस्तान निश्चित रूप से इस मामले में अंतरराष्ट्रीय जांच का खामियाजा भुगत रहा है।

प्रश्न:

1. भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ाने में ‘जम्मू-कश्मीर विवाद’ की भूमिका की आलोचनात्मक टिप्पणी कीजिए।